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चीन आखिर चाहता क्या है?

शांति और युद्ध एक साथ सम्भव नहीं हो सकते लेकिन चीन की मंशा कुछ ऐसी ही है।  चीन, एक तरफ शांति की कोशिश करता हुआ दिख रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ ख़ुद युद्ध के लिए ज़मीन बनाने में जुटा है। एक छोर पर भारत और चीन आमने सामने हैं तो दूसरी तरफ चीन अमेरिका और उत्तर कोरिया। इनके बीच चीन शांतिदूत बनने की कोशिश कर रहा है। डोकलाम के हालात पर चीन बात नहीं करना चाहता है, लेकिन अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच छिड़ी जंग में मध्यस्थता करने के लिए तैयार है। चीन चाहता है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया बातचीत के जरिये मुद्दे को हल करें। अमेरिका, उत्तर कोरिया के इलाके में सैन्य अभ्यास और उत्तर कोरिया अपना मिसाइल कार्यक्रम रोक दे।

चीन का कहना है कि उत्तर कोरिया द्वारा पहले हमले की स्थिति में वह तटस्थ रहेगा लेकिन अगर अमेरिका ने पहले हमला किया तो वह उत्तर कोरिया का समर्थन करेगा। उत्तर कोरिया जिस तरह से अमेरिका पर हमले करने के लिए उतावला दिख रहा है, उस स्थिति में अमेरिका अपनी साख बचाने के लिए चुप बैठने से रहा। ऐसे हालात में युद्ध होना तय है। अमेरिका ने अपने गुआम द्वीप पर अलर्ट जारी कर दिया है। उत्तर कोरिया और अमेरिका बीच युद्ध में चीन को अपना फ़ायदा दिख रहा है। चीन अमेरिका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है, जो उसके विश्व शक्ति बनने में रोड़ा बनके खड़ा है।

उत्तर कोरिया द्वारा हमले की स्थिति में जापान साफ़ कर चुका है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए कोरियाई मिसाइलों को रोकेगा, जो केवल उसकी सुरक्षा के लिए होगा. हालांकि, जापान और अमेरिका के सम्बन्धों को देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि जापान पूरी तरह से अमेरिका के साथ जाएगा. मगर मज़बूरी में जापान, अमेरिका का रक्षा कवच बनेगा।

वहीं चीन एक तरफ युद्ध से बचने के लिए उपाय बताने में जुटा है दूसरी तरफ खुद जानबूझकर युद्ध के हालात पैदा कर रहा है। ऐसे में उसका ये गुरिल्ला वार समझना मुश्किल है कि आखिर चीन का चरित्र क्या है।

आधुनिक चीन के संस्थापक माओत्से तुंग के अनुसार “शांति के लिए युद्ध आवश्यक है” चीन के असली चरित्र को उजागर करते हैं. अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच चीन द्वारा मध्यस्थता का प्रस्ताव, विश्व शांति के प्रयासों के लिए एक ढकोसले के सिवाय कुछ नहीं है।

अगर डोकलाम विवाद को लेकर भारत-चीन के बीच युद्ध हुआ तो अमेरिका निश्चित तौर पर भारत का साथ देगा। भारत का अभिन्न मित्र रूस किस स्थिति में होगा, इस पर संशय ज़रूर है. अमेरिका के साथ आने पर भी रूस भारत के प्रति वही सोच रखेगा या फिर अपनी समाजवादी बिरादरी के चीन का साथ देगा? हर तरफ युद्ध के मोर्चे पर खड़ीं दुनिया के लिए चीन की चाल का अंदाजा लगाना मुश्किल है।

युद्ध भारत और चीन के बीच हो या फिर उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच शांत कोई नहीं बैठ पाएगा। परमाणु हथियारों से सजे इस विश्व में युद्ध कभी भी सम्भव है। चाल चीन की है, लडेगा पूरा विश्व और इस युद्ध का परिणाम पूरे विश्व को भुगतना पड़ेगा।

 

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