Today: Monday, March 30 2026

गुनाहगार हूं तुम्हारे माथे पर होठों से चांद बनाने का

लो बना दिया तुम्हारे माथे पर चाँद
जो तुम्हारी हसरत थी
नहीं जानता कि यह प्रेम है

या

प्रेम में लिपटी हवस
जो मैं बार-बार तुम्हारे क़रीब आता हूँ।
तुम जानती हो कि मैं प्रेम नहीं करता

लेकिन

तुम्हारा यह मुझ पर बेशर्त कुर्बान होना
मुझे बहका देता है

और

मैं छू लेता हूँ तुम्हारे गालों को
उलझ जाता हूँ तुम्हारे बालों में
और चूम लेता हूँ होंठ तुम्हारे
पता नहीं

कि

तुम्हारा प्रेम अधिक सच्चा है या मेरी हवस?
अगर मानूँ कि प्रेम सच्चा है

तो

मैं तुमसे प्रेम न करने का दोषी हूँ
और

जानूँ कि हवस सच्ची है

तो

मुझे कोई अधिकार नहीं

कि

तुम्हें खिलौना बना कर खेलूँ

गुनहगार हूँ तुम्हारे माथे पर अपने होठों से चाँद बनाने का।

इस लेखक के और लेख

रागिनी को ससुराल वालों ने नहीं समाज ने मारा है

हैप्पी बड्डे: फिराक गोरखपुरी साहब

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारा Youtube चैनल

पुराना चिट्ठा यहां मिलेगा

March 2026
S M T W T F S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
293031