लोकसभा चुनाव: क्या भारत में भी दो वोट देने की सुविधा होनी चाहिए?

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, मानो बुद्धिजीवियों की बाढ़ सी आ गई है। कोई बोल रहा है कि अच्छा कैंडिडेट चुनें तो कोई बोल रहा है कि पार्टी को वोट करें। अब जो कैंडिडेट को वोट करने को बोल रहे हैं, उनसे एक सवाल है कि अगर कैंडिडेट को वोट कर भी दिया तो क्या होगा, क्या वो जो वादे कर रहा है, वही वादे सभी उम्मीदवार कर रहे हैं, जो उसी की पार्टी के हैं? क्या उसके सांसद बनने के बाद उसकी बात सुनी भी जाएगी या कहीं वो महज एक सांसद बनकर ही रह जाएगा। अब जो लोग बोल रहे हैं कि पार्टी को वोट करो चाहे कैंडिडेट जो भी हो। अब ऐसे में तो कोई माफिया या हत्यारोपी भी सांसद बन सकता है।

अब समझते हैं दिक्कत कहां है?
दिक्कत है हमारी चुनावी प्रणाली में, हमारी जो चुनावी प्रणाली है वह है FPTP- First-past-the-post इसका मतलब पहले आओ और पहले पाओ। हम इसमें खाली एक कैंडिडेट चुनते हैं और दिक्कत यहीं से शुरू होती है क्योंकि वो कैंडिडेट के साथ-साथ एक पार्टी का मेंबर भी होता है। अगर वो पार्टी का मेंबर है तो हम वोट उसको नहीं उसी की पार्टी को कर रहे हैं। अंत में उसकी पार्टी की विचारधारा ही देश पर लागू होगी न कि खाली उस कैंडिडेट की।

अब आपके मन में एक सवाल जरूर आ रहा होगा कि अब हम मजबूर हैं ऐसा करने को क्योंकि वोट तो देना ही है लेकिन इसके साथ आपके मन में ये भी ख्याल आता होगा कि काश हम पार्टी और सांसद दोनों को अलग-अलग चुन पाते। जहां पार्टी पसंद होती, वहां पार्टी और जहां कैंडिडेट पसंद होता वहां कैंडिडेट। अगर ये सवाल आपके मन में आया है तो आप का ख्याल सच हो सकता है। आइये बताते हैं वो कैसे।

यही सवाल पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस.वाई. कुरैशी से पूछा गया था उन्होंने इसका क्या विकल्प बताया था। इस सवाल पर कुरैशी ने कहा, ‘मैं दृढ़ता से सुझाव देता हूं कि हम जर्मन मॉडल की एक मिश्रित प्रणाली का कुछ बदलावों के साथ अनुसरण कर सकते हैं। जर्मनी में, हर मतदाता दो वोट का प्रयोग करता है। एक अपने निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवार के लिए और दूसरा पार्टी के लिए।’

अब सवाल है कि मिश्रित प्रणाली क्या है….
वैसे तो दुनियां में कई तरह की चुनाव प्रणालियां हैं। उसमें से एक है Mixed-member proportional (MMP) System इसको हिंदी में कहते हैं- मिश्रित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व … इसमें वोट देने का तरीका हमारे यहां से अलग है। इसमें मतदाताओं को दो वोट मिलते हैं- एक अपने एकल सीट वाले निर्वाचन क्षेत्र के लिए प्रतिनिधि तय करने के लिए और एक राजनीतिक दल के लिए। इससे आपकी वो वाली समस्या भी हल हो जाएगी, जिसको लेकर आप और हम सब रोते हैं कि पार्टी तो सही है लेकिन कैंडिडेट में वो दम नहीं और कई बार समस्या उल्टी भी होती है कि यार कैंडिडेट तो एकदम मस्त है लेकिन उसकी पार्टी मुझे पसंद नहीं है तो आपकी इन दोनों ही समस्यों का समाधान है Mixed-member proportional (MMP) System. लेकिन हम इसकी बात न कर के बस ज्ञान देंगे की अच्छा कैंडिडेट चुनो।

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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