…तो महबूबा सरकार गिराने के पीछे बीजेपी की झल्लाहट है?

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन वापस लेते हुए सरकार गिरा दी है, जिसके चलते राज्य में राज्यपाल शासन लगभग तय है। कांग्रेस और नैशनल कॉन्फ्रेंस ने पीडीपी को समर्थन ना देने की बात भी साफ कर दी है। ऐसे में अब यह संभव दिख रहा है कि राज्य में फिर से चुनाव ही कराए जाएं। विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला ने तो राज्यपाल से मिलकर बाकायदा इसकी मांग भी कर डाली है।

समर्थन वापसी के पीछे बीजेपी ने कई सारे तर्क दिए हैं, जिसमें यह कहा गया है कि महबूबा मुफ्ती पत्थरबाजों के प्रति सख्त रुख अख्तिार नहीं कर रही थीं और राज्य में लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं। हालांकि, इस समय समर्थन वापसी के पीछे जो सबसे मजबूत कारण दिख रहा है, वह है 2019 का लोकसभा चुनाव। कर्नाटक में सरकार ना बना पाना, उपचुनावों में हार, जम्मू-कश्मीर में सेना की कई जवानों की मौत और महंगाई जैसे तमाम मुद्दों पर घिर रही बीजेपी ने आखिरकार एक ‘ब्रह्मास्त्र’ चलाया है।

मोदी-शाह की जोड़ी भी ढूंढ रही मुद्दा
आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाने वाली नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी काफी समय से चुप है और 2019 के लिए फॉर्म्युला तलाशने में जुटी हुई है। कई बार यह भी अफवाहें आईं कि बीजेपी 2019 से पहले राम मंदिर के पक्ष में फैसला करवा लेगी और फिर से ध्रुवीकरण हो जाएगा लेकिन आखिर में बीजेपी ने रास्ता कश्मीर से होते हुए निकाला।

ऐक्शन दिखाकर वोट मांगेगी बीजेपी?
संभव है कि बीजेपी कश्मीर में राज्यपाल के माध्यम से सरकार पर नियंत्रण रखे और 2019 तक कुछ ऐसी कार्रवाई करे, जिससे कि उसके ‘देशभक्त वोटर्स’ जाग जाएं और जाति में बंटने की बजाय, वे फिर से ‘हिंदू’ हो जाएं। दरअसल, यूपी की तीन लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में ‘हिंदुओं’ का दलित, यादव और अन्य जातियों में बंच जाने और विपक्षियों के एक हो जाने से बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी। संभावित महागठबंधन को देखते हुए बीजेपी को किसी ऐसे फॉर्म्युले की जरूरत है, जिससे वह महागठबंधन को हरा सके।

जरूरी मुद्दों पर विफल तो नया विषय पैदा करने की कोशिश?
नोटबंदी, महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतें, रोजगार, किसानों के मुद्दे, भ्रष्टाचार के मुद्दे और अन्य प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर लगभग विफल होने और बुरी तरह घिरने के बाद बीजेपी को 2019 में दिखाने के लिए कुछ मिल नहीं रहा है। रोचक यह देखना होगा कि नरेंद्र मोदी 2019 में किस बात पर वोट मांगेंगे। जाहिर तौर पर उन्हें बाकी बचे कुछ महीनों में ऐसी कम से कम एक वजह तो पैदा करनी ही है।

इस लेखक के और लेख

पॉलिटिकल लव: भारतीय राजनीति का धरनेबाज आशिक कौन?

कैसे संभलेगी कश्मीर की नैया राज्यपाल भरोसे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारा Youtube चैनल

पुराना चिट्ठा यहां मिलेगा

June 2026
S M T W T F S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930