चुनाव के इस दौर में आचार संहिता का इंटरव्यू पढ़ लीजिए

एक वक्त था, जब चुनाव में उनका खौफ हुआ करता था। नेता लोग कुछ भी बोलने से पहले सोचते थे कि कहीं वह नाराज न हो जाएं। उनके लगते ही सब बदल जाता था। पहले नेता के हाव-भाव सब कुछ बदल जाते थे, लेकिन वक्त के साथ सब बदलता चला गया और आज नेता लोग उनकी कद्र करना बिल्कुल ही भूल गए हैं। अब उनके लगने और न लगने का कोई फर्क नहीं रहा। जी हां, हम यहाँ बात कर रहे हैं, चुनाव आयोग की दुलारी आचार संहिता जी की। आजकल वह बड़ी परेशान हैं और इसी परेशानी के कारण वह डिप्रेशन में चल रही हैं। आइए उनकी सुनते हैं कि वह क्या कहना चाहती हैं, क्योंकि आपको तो पता ही है कि उनकी कोई और नहीं सुनता है।

फलाने– नमस्कार आचार संहिता जी
आचार संहिता- नमस्कार फलाने जी

फलाने-अच्छा आपको क्या लगता है कि ये नेता लोग क्यों आपका उल्लघंन करते हैं?
आचार संहिता– ये सब आपके लिए करते हैं क्योंकि इनके कुछ भी बोलते ही आप उनके पीछे हो लेते हो। बाकी जनता को भी कुछ नया चाहिए होता है, हर बार तो कुछ तो करेगा न नेता, आपको भी TRP दिलवानी है और जनता को भी बहकाना है।

फलाने– आपका इतना उल्लंघन किए जाने के पीछे किसका हाथ है?
आचार संहिता– फलाने जी इसके पीछे किसी और का नहीं बल्कि मेरे परिवारवालों का ही हाथ है, वे अब उनके भक्त हो गए हैं और आप तो जानते ही हैं कि जब कोई भक्त हो जाता है तो उसको बुराई नहीं दिखती है।

फलाने– आप इतने उल्लंघन पर आवाज क्यों नहीं उठातीं?
आचार संहिता– इतने साल से आप उठा पाए क्या जी जो मुझे सलाह दे रहे हैं? और वैसे भी आवाज उठाकर क्या करना है, आप तो बस उनकी ही सुनाओगे मेरी थोड़ी न सुनोगे।

फलाने– कई बार सुने हैं कि आपके उल्लंघन के बाद आपके भाई को नोटिस जाते हैं, आपका बदला लेने। आपको क्या लगता कोई फायदा है क्या उनके जाने का?
आचार संहिता– देखिए फलाने जी, पूरे घर में वो अकेला है जो मेरे लिए खड़ा होता है। आवाज भी बंद कर देता है कई बार तो लोगों की लेकिन बेचारा वो भी मजबूर है, क्योंकि जब घर के सब बड़े भक्त हो गए हैं तो अकेला कब-तक और कितनों से लड़ेगा। छोटे-मोटे लोगों को तो निपटा देता है लेकिन बड़े लोगों को हमारे ही घर के बड़े लोग बचा लेते हैं।

फलाने-भाई से याद आया आपके घर में एक और शख्स हैं, जिनको आपके उल्लंघन के बाद सबसे ज्यादा जल्दी होती है….
आचार संहिता-हां मैं समझ गई आप क्लीन चिट जी की बात कर रहे हैं, वो थोड़ा जल्दबाजी में रहते हैं हमेशा। वो नोटिस भइया से बिल्कुल ही उलट हैं, जहाँ नोटिस भइया दाग देते हैं वहीं क्लीन चिट जी उन दागों को क्लीन कर देते हैं। वो हल्का फुल्का क्लीन नहीं करते, वो ऐसा क्लीन करते हैं कि टाइड भी उनकी सफाई का लोहा मानता है।

फलाने-इतने उल्लंघन के खिलाफ आप सु्प्रीम कोर्ट क्यों नहीं जातीं?
आचार संहिता-वहाँ भी क्या ही जाऊं आजकल तो उनकी बातें भी इग्नोर ही कर रहे हैं लोग और वैसे भी मुझे सुबह मॉर्निंग वॉक पर भी जाना होता है।

फलाने-आप क्या करने की सोच रही हैं?
आचार संहिता– मैं बहुत परेशान हूँ, बस घर वालों से बात करने की सोच रही हूँ कि वो लोग मुझे खत्म ही कर दें क्योंकि मैं ऐसे रोज अपना उल्लंघन होते नहीं देख सकती, मैं बहुत डिप्रेशन में हूँ। जा रही हूँ एफबी पर स्टेटस अपडेट करने कि फीलिंग डिप्रेस्ड।

फलाने-आप हमारी जनता से कुछ बोलना चाहेंगी?
आचार संहिता– बस एक शब्द बोलना चाहती हूं, प्लीज हेल्प मी फ्रेंड्स।

तो सुना आपने दोस्तों कि कितनी परेशान हैं आचार संहिता जी, हम सब को इनकी मदद करनी चाहिए और अपने नेता से गुजारिश करनी चाहिए कि वो इनका उल्लंघन न करें नहीं तो वो अपने वोट से हाथ धो बैठेंगे। हम सब को आचार संहिता के लिए सोशल मीडिया पर ट्रेंड भी चलाना चाहिए जिससे वो झूठा ही सही लेकिन फीलगुड करें।

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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