कविताईः ‘जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध’

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवियों में गिने जाते हैं। राष्ट्रीय चेतना से भरपूर उनकी रचनाएं आज भी साहित्य-प्रेमियों […]

क्या गांधी के देश में विरोध का स्वरूप गांधी के विरोध की तरह है?

लोकतंत्र में विरोध होना जायज है। जब-तक जनता अपनी स्वस्थ मांगों को लेकर सरकार के सामने विरोध नहीं करेगी तब तक वह लोकतंत्र लगभग अधूरा रहेगा।और जब यह विरोध ख़त्म हो जाएगा तो वह लोकतंत्र तानाशाही में परिवर्तित होने लगेगी,लेकिन प्रश्न यह है कि विरोध का स्वरुप कैसा हो??

विराट कोहली सदर होते हुए भी धोनी के नायब ही हैं

तेज हुंकार और जोश-ओ-खरोश के साथ सेनापतियों को अपने सैनिकों को ऊर्जित करते हुए बहुत देखा-सुना है हम सबने। मगर एक सेनापति ऐसा भी है […]

कैशलेस पर मोदीजी को बाहर से समर्थन दे रहे हैं ‘राष्ट्रवादी एटीएम’

देश कैशलेस की ओर बढ़ रहा है। मोदी जी का सपना कोई और नहीं खुद देशभर की गली-गली में लगे एटीएम पूरा कर रहे है। […]

हम हिंदुस्तानी दरअसल चरसी हैं

हम हिंदुस्तानी दरअसल चरसी हैं. चरस, भांग, गांजा और अफीम भारत में प्रतिबंधित है. मतलब आप वैधानिक रूप से फूंक नहीं सकते. कहीं पब्लिक प्लेस […]

कोर्ट ‘निर्दोष’ साबित करता रहेगा तो दोषी को कौन ढूंढेगा?

हमारा कानून इस सिद्धांत पर चलता है कि चाहे 100 दोषी छूट जाएं लेकिन एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। इस सिद्धांत पर ही […]