कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है: गोपालदास नीरज

नीरज ने बॉलीवुड के लिए अनेक लोकप्रिय गीत लिखे। उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार के अलावा पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे नागरिक सम्मान भी हासिल हैं।

जनता तो आम आदमी पार्टी को पहले ही एक ‘पार्टी’ मान चुकी है

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के उम्मीदवारों के नाम जैसे ही सामने आए, लगभग सभी आलोचना करने लगे और बोलना शुरू कर दिया कि आम […]

जातीय लड़ाई में उलझता जा रहा है भारत का युवा

पुणे के भीमा-कोरेगांव से शुरू हुई जातीय हिंसा का असर महाराष्ट्र सहित पूरे देश में दिखने लगा है। सोमवार को हुई हिंसक घटनाओं ने इस […]

तो क्या केजरीवाल ने इस बार रही-सही उम्मीद भी तोड़ दी?

मैं खुद आम आदमी पार्टी को उसके जन्म से जानता हूं, समझता हूं और काफी हद तक सहानुभूति रखता ‘था’। जी हां, रखता था। यह […]

सपनों के ‘सी-प्लेन’ पर उड़ता एक आम नागरिक

आज पापा का मेरे ‘स्वदेशी’ वाले नम्बर पर कॉल आया। बोल रहे थे कि देश में इतना सौहार्द और भाईचारा वाला माहौल बना हुआ है […]

श्रद्धांजलिः नहीं रहे उर्दू ‘गीताकार’ और शायर अनवर जलालपुरी

अनवर ने एक बार कहा था कि छात्र जीवन से ही उनके दिमाग में यह बात थी कि कुरआन तो उन्होंने पढ़ी ही है तो क्यों न हिंदू धर्म की किताबें भी पढ़ी जाएं।

प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है

प्रजातंत्र के रक्षकों के लिए संविधान सिर्फ एक ढाल बनकर रह गया है जो समय-समय पर इन्हें सत्य पर असत्य की जीत दिलाता है। ये लोग भाषा की संयमता पर भी सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हुए एक-दूसरे पर आक्षेप लगाते है।

पॉलिटिकल लव: क्या मेरा ‘विश्वास’ तोड़ दोगे?

तुम मेरे लिए कुछ नया कब करोगे? देखो, मैंने तुम्हारे लिए साल को नया कर दिया। चलो फिर न्यू ईयर गिफ्ट दो। अच्छा जी सब […]

नव वर्ष कुछ यूं क्यों ना मंगलमय हो?

नव वर्ष की अनन्त शुभकामनाएं एवं बधाई। सभी बड़ों को प्रणाम और छोटों को ढेर सारा प्यार। आप सभी को एक-एक महीना, एक एक सप्ताह, […]

हैप्पी न्यू ईयर 2018: काश ये साल महज़ इवेंट के नाम न रह जाए

एक से एक इवेंट हो रहे हैं हमारे देश में, कुछ  सफल हो जाते हैं और कुछ असफल, हाल ही के वर्षों में बहुत से […]