Tag: कविता
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मिलती मुद्दत में है और पल में हँसी जाती है
आप की याद भी बस आप के ही जैसी है, आ गई यूँही अभी यूँही अभी जाती है।
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कभी तो सामने आ बे-लिबास हो कर भी
कभी तो सामने आ बे-लिबास हो कर भी, अभी तो दूर बहुत है तू पास हो कर भी. तेरे गले लगूँ कब तक यूँ एहतियातन मैं, लिपट जा मुझ से कभी बद-हवास हो कर भी. तू एक प्यास है दरिया के भेस में जाना, मगर मैं एक समुंदर हूँ प्यास हो कर भी. तमाम अहल-ए-नज़र…
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अग्नि वर्षा है तो है हां बर्फ़बारी है तो है
दुष्यंत चले गए. उनकी ग़ज़लें अमर हैं. जिन्होंने दुष्यंत कुमार को नहीं देखा, वे एहतराम साहब से मिल सकते हैं. एहतराम इस्लाम, हिंदी ग़ज़ल के चर्चित चेहरे हैं. देश भर लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनकी ग़ज़लें प्रकाशित हो गई हैं. ग़ज़ल में हिंदी का जैसा प्रयोग एहतराम साहब ने किया है वैसा कहीं और…
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गांव आज भी धर्म नहीं समझ पाते तभी जुम्मन यादव होते हैं और रघुवीर खान
मेरे गांव में जुम्मन यादव होते हैं रघुवीर खान क्योंकि मेरा गांव हिन्दू मुसलमान नहीं जानता
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काश! इश्क़ की बातें होतीं
काश के मेरा नाम इश्क़ होता तुम्हारा नाम भी इश्क़ होता क्या होता जब सबका नाम इश्क़ होता। हम जिस देश में रहते उस देश का नाम इश्क़ होता हमारे घर का पूरा पता इश्क़ होता, वो इश्क़ में बोलता मै उसे इश्क़ में सुनता कैसा होता जब हम सबकी बोली में ही शामिल इश्क़…
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हैप्पी बड्डे: फिराक गोरखपुरी साहब
हर किसी की जिंदगी के समानांतर एक और जिंदगी होती है और यह सबको दिखाई नहीं देती । यह जिंदगी का एक दूसरा रंग होता है, जो किसी चित्रकार के कैनवास पर तस्वीरों की शक्ल में अपने होने की सूचना देता है, तो कभी किसी शाइर की शायरियों में प्रकट होकर अपने अस्तित्व का आभास…
