Tag: कहानी
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मिलती मुद्दत में है और पल में हँसी जाती है
आप की याद भी बस आप के ही जैसी है, आ गई यूँही अभी यूँही अभी जाती है।
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किस्सा: मरते-मरते लाला ने ऐसा क्या किया जो गांव भर पहुंच गए जेल
किसी गांव में एक मुंशी रहता था, नाम था खटेसर लाल। बहुत धूर्त और काइंया किस्म का आदमी था। जितनी भद्दी शक्ल उतनी ही बुरी अक्ल। गांव वाले उसे राक्षस कहते थे। पाई-पाई का हिसाब रखता था। गांव भर में सूद पर पैसे बांटता फिर उगाही करता। दादा ले पोता बरते। हाल यह था कि…
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गांव आज भी धर्म नहीं समझ पाते तभी जुम्मन यादव होते हैं और रघुवीर खान
मेरे गांव में जुम्मन यादव होते हैं रघुवीर खान क्योंकि मेरा गांव हिन्दू मुसलमान नहीं जानता
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कहानी: तीन दोस्त, सियासी गिद्ध और मौत
मोहित,सोनू और इरफान की दोस्ती के चर्चे पूरे कस्बे में मशहूर थे। आखिर कौन भूल सकता था, जब कल्लू ने इरफान की बहन को छेड़ने वाले को बीच बाजार में नंगा कर दिया था। दरअसल, वो सिर्फ इरफान की ही बहन नही थी बल्कि वो मोहित और सोनू को भी हर रक्षाबंधन पर उनकी कलाई…
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रामायण की कहानी कलियुग की ज़ुबानी
आज अगर रावण होता तो सबसे बड़ा टैक्स पेयर होता। भाई उसके पास सोने की लंका थी, वो सबकी लंका लगा देता। रावण को उसका घमण्ड नहीं जीएसटी बर्बाद कर देता और बाकी बची कसर नोटबन्दी निकाल देती। रावण को जब तक समझ आता तब तक मोदी जी विदेश निकल लेते। कुम्भकर्ण को आप सब…
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मैं पूजा नहीं कर रही थी, एक बच्चे को प्यार कर रही थी- इस्मत चुग़ताई
ज़ंजीर कोई भी हो, अगर टूटेगी तो आवाज़ होगी. साहित्य और अदब में भी जब कभी कोई ज़ंजीर टूटती है, आवाज़ होती है. आवाज़ धीरे-धीरे शोर बन जाती है. शोर लोगों का ध्यान अपनी तरफ़ खींचता है. ऐसा ही एक शोर उठा था पचास के दशक में, जब इस्मत चुग़ताई ने ‘लिहाफ़’ लिखी थी. ‘लिहाफ़’,…
