पिछले साल अमेरिका से आने के बाद राहुल गांधी देश के एक प्रखर वक्ता के रूप में उभरे हैं। उनकी भाषण कला में अचानक से […]
Month: February 2018
क्लिकबेट वाला मीडिया और मौत में दफन होते मुद्दे
एक गाना याद आ रहा है ‘भूल गया मैं सब कुछ, अब याद नहीं है अब कुछ’ यही हाल मीडिया का है। अब मीडिया भूल […]
जाते-जाते हंसने का पैगाम देकर चली गईं श्रीदेवी
किसी शायर ने ठीक ही कहा है- ज़िंदगी क्या है फ़कत मौत का टलते रहना. वक़्त कई बार इसका एहसास भी करा देता है. […]
देहाती आदमी का प्रधानमंत्री को खुला पत्र! मुझे पइसा उधार दे दो..
प्यारे प्रधानमंत्री जी! कुछ लोग प्यार करते हैं. कुछ लोग कारोबार करते हैं. पहले वाले की जिंदगी रो-रोकर बीतती है. घर वाले चांप देते हैं. […]
पॉलिटिकल लव: हमारे विकास का मुद्दा चुनावी नहीं है
तुम लव लेटर रोटोमैक से लिखते हो क्या
क्यों क्या हो गया जी
हुआ कुछ नहीं बस तुम्हारे लेटर में काफी घोटाले नज़र आ रहे हैं.
क्या अराजकता को बीजेपी से जोड़ना ट्रेंड बन गया है?
लगता है बीएचयू और शांति दो विपरीत ध्रुव हो गए हैं,जो अब कभी एक साथ नहीं हो सकते है। बीएचयू एक बार फ़िर विवादों में […]
पॉलिटिकल लव: वैलेंटाइन, नागपुर और वॉरियर का कॉकटेल
चलो न वेलेंटाइन डे आ रहा है कहीं घूमने चलें, हां, चलो वहाँ चलते हैं जहाँ नफरत हो, क्यों वहाँ क्या करना जाकर ? हम […]
राजीव गांधी ने जो श्रीलंका में किया मोदी वही मालदीव में करेंगे?
मालदीव में सत्ता और न्यायालय के टकराव के बाद स्थिति गंभीर है। मालदीव का विपक्ष और कोर्ट भारत से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है। […]
घर लौटना चाहता है 1857 की क्रांति का एक सिपाही
लंदन के एक पब लॉर्ड क्लायड के मालिकों ने साउथ ईस्ट एशिया के इतिहास पर काम करने वाले इतिहासकार किम वैगनर से संपर्क किया है। […]
पॉलिटिकल लव: प्यार के बजट की समीक्षा
इस बार कहाँ जा रहे हो
कासगंज जाने की सोच रहा हूँ
क्यों तुमको भी अपनी रोटियां सेंकनी है वहाँ !
अरे बाबा बस वहाँ दुबारा प्यार भरना है