आज राजनीतिक और सामाजिक विमर्श पोस्टट्रुथ और ट्रोलिंग के दहलीज पर पहुंच गए. और सबसे दिलचस्प ये है कि आज का युवा इसी राजीतिक विमर्श के बीच खुद को खड़ा पाता है
Year: 2018
आंबेडकर का रंग चाहे जितना बदलो ‘असली वाला’ 2019 में दिखेगा
2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हालत पतली होने के बाद नरेंद्र मोदी ने खुद को विकास-पुरुष के रूप में प्रोजेक्ट किया। ऊपरी तौर […]
बुक रिव्यू: चार अधूरी बातें
कभी-कभी एक मुलाक़ात में बहुत सारी बातें हो जाती हैं और कभी-कभी बावजूद बहुत सारी मुलाक़ातों के कुछ बातें अधूरी रह जाती हैं। यह अधूरी […]
न प्रेस कार्ड है, न प्रिंटिंग प्रेस, न नौकरी, फिर भी अखबार निकालता है यह पत्रकार
मुज़फ्फर नगर में एक पत्रकार ऐसा भी है जिसके पास न अपनी छपाई मशीन है, न कोई स्टाफ और न सूचना क्रांति के प्रमुख साधन-संसाधन। […]
आखिर कैसा हो आज के समय के आंदोलनों का स्वरूप?
जातियों और समुदायों के बीच बढ़ रही खाई के जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ हम हैं, ना की कोई सरकार, प्रशासन, पार्टी या नेता। हम खुद […]
पॉलिटिकल लव: प्यार में कहीं ‘भारतबंद’ ना कर देना
तुम न बहुत झूठ बोलती हो, अच्छा ज्यादा आरोप न लगाओ नहीं तो मानहानि का केस कर दूंगी। कर दो मैं माफी मांग लूंगा। तुम […]
…वह आर्मी चीफ जिसे देशद्रोही तक कहा गया
आज जन्मदिन है भारतीय थल सेना के उस नायक का जिसपर आरोप लगते थे कि वह देशद्रोही और सरकार द्रोही हैं। उनकी क्षमताओं पर सवाल […]
…जब एक इंजिनियरिंग स्टूडेंट 3 रुपये के लिए क्रिकेटर बन गया
आम भारतीय माँ-बाप जैसे ही अजीत वाडेकर के माँ-बाप भी अपने बेटे को इंजीनियर बनाना चाहते थे। बेटे को लेकर बुने जा रहे अपने इन्हीं […]
भवानी प्रसाद मिश्रः जन्मदिन विशेष – ‘सतपुड़ा के घने जंगल’
अज्ञेय के दूसरे तारसप्तक के कवि भवानी प्रसाद मिश्र ने इस देश के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आपातकाल तक के इतिहास को अपनी आंखों से देखा है।