पॉलिटिकल लव: 3 लाख फॉलोवर लाओ तब मेरे सामने टिक पाओगे

मैं भाषण देने लगा तो तुम 15 मिनट नहीं टिक पाओगी।
अच्छा बिना पर्चे के बोलकर दिखाओ भाषण।
बिना पर्चे के तो तुम भी नहीं बोल पाओगी।
अरे रहने दो तुम तो 15 मिनट बाथरूम में भी नहीं टिक सकते।
अरे इसमें बाथरूम की बात कहां से आ गई और भला 15 मिनट बाथरूम में करूंगा क्या?

यार मुझे चोट लग गई है।
चोट तो लगती रहती है, इसमें क्या बतंगड़ बना रही हो!
मैं बतंगड़ कब बनाई जरा ये बताना तुम?
हर बार तो बनाती हो।
तुम्हारे बोल कुछ ज्यादा नहीं बिगड़ गए हैं आजकल?
बोल तो नहीं बिगड़े हैं बस थोड़ा परेशान हूं।
अच्छा मुझे लगा नेता बन गए हो इसलिये बोल बिगड़ गए हैं।

अच्छा सुनो अब हम न मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
चर्चा करने से पहले 3 लाख ट्विटर फॉलोवर तैयार करो।
अच्छा जी ज्यादा न साहब की नकल की कोशिश मत करो तुम!
नहीं वो बस थोड़ा बहुत सोचे कि चर्चा दूर तक जाए इसलिये बोले हम तो।
दूर तक तो बाद में जाएगी पहले हम तो कर लें।

अच्छा मेरी फ़ोटो कहां है?
अरे वो तो घर ही भूल गया मैं।
मेरा नाम भी नहीं है रैली के पोस्टर में क्या बात है?
बात कुछ नहीं है वो बस थोड़ा जल्दबाजी में गड़बड़ी हो गई।
ये गड़बड़ी यूपी में ही क्यों होती है जी?

तुम कुछ भी फैसले सुना रही हो आजकल।
तो क्या हुआ न्याय तो हो रहा है ना !
न्याय तो हो रहा लेकिन राइट साइड का ही हो रहा है।
तो क्या हुआ न्याय मिलना चाहिए चाहे किसी को मिले।
तुम ऐसे नहीं मानोगी महाभियोग लाएंगे तुम्हारे खिलाफ।
ले आओ जाओ तुम्हारे घर वाले मेरे फैसले के साथ हैं।
हां-हां उठा लो फायदा घर वालों के राइट होने का।

यह कौन सी भाषा में लिखे हो?
हिंदी में लिखे और किसमें लिखे फिर?
इंग्लिश में या कन्नड़ में लिखो मुझे हिंदी इतनी समझ नहीं आती।
अच्छा जी जब जवाब देने की बात आई तो हिंदी नहीं आती!
तुम लिखो इंग्लिश या कन्नड़ में मैं जवाब दूंगी।
जब से कर्नाटक गई हो असर आ रहा है वहां का।

तुम्हारे गाल कितने अच्छे हैं ना।
अच्छे तो हैं लेकिन छूना मत।
क्यों तुम पत्रकार हो क्या?
पत्रकार तो नहीं हूँ पर मैं चेन्नई से जरूर हूँ।
कोई बात नहीं गाल छू कर माफी मांग लूंगा।

तुम्हें पता है मेरे दादा के दादा भी फेसबुक पर थे।
चलो न तब तो इंटरनेट ही नहीं था।
अरे तुम्हें कुछ नहीं पता इंटरनेट महाभारत काल से है।
अच्छा तुम्हारे दादा के दादा मणिपुर में रहा करते थे क्या?
हां, तुम्हें कैसे पता?
अरे क्योंकि महाभारत टाइम में सबसे पहला टावर इंटरनेट का मणिपुर में ही लगा था।

चलो कहीं घूमने चलते।
ठीक है अमेठी चलते हैं।
क्यों अमेठी सिंगापुर-कैल्फोर्निया बन गया क्या?
नहीं उसमें 15 साल लगेंगे।
फिर कहीं और चलो अमेठी 15 साल बाद जाएंगे।

कल रात में कहां गए थे?
मैं एक रेस्टोरेंट का उद्घाटन करने गया था।
वो रेस्टोरेंट नहीं नाइट क्लब था।
मैंने तो रेस्टोरेंट ही समझा था।
सच बोल रहे हो या महाराज की तरह बेवकूफ बना रहे हो?

तुम बोलते क्यों नहीं हो?
बोलता तो हूँ मैं और वो भी नॉन स्टॉप।
हां बस बाहर ही बोलते हो घर में तो मौनी बाबा बने रहते हो।
अरे यार घर में हिम्मत नहीं होती।
लगता है तुम्हें भी हिम्मत के लिए लंदन जाना पड़ेगा!
वही सोच रहा हूँ बस एक कवि का भी इंतजाम हो।

बिना बताए गायब हुए तो तुम गए।
क्या करने वाली हो जी?
हर्जाना लगा दूंगी जितनी देर गायब रहोगे।
अच्छा जी कितना हर्जाना लगेगा जी वो तो बताओ?
पहले एक घंटे तो कुछ नहीं उसके बाद 50 रुपये वाली डेरी मिल्क हर घंटे के हिसाब से।
तुम्हारी पॉलिसी दिल्ली से प्रभावित लग रही है।
अब मैं दिल्ली की हूँ तो प्रभाव भी तो वहीं का होगा।

रोना आ रहा है यार।
अरे क्यों रो रहे हो तुम बताओ?
अरे वो टिकट नहीं मिली मुझे।
क्यों कर्नाटक से टिकट ले रहे थे क्या?
हां तुम्हे कैसे पता चला?
वहाँ किसी को भी टिकट नहीं मिल रही है आजकल।

यार ना ट्रेन सही है और ना ही एयरोप्लेन।
अच्छा तुम्हारे में भी खिड़की उड़ गई क्या?
हां यार, तुम ही बताओ कुछ कहाँ सफर सेफ है?
लोकल डिब्बा से सफर करो मज़ेदार भी है और सेफ भी।

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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