प्रदूषण का ‘होम्योपैथी’ इलाज जरूरी है

अक्टूबर बीत गया अब नवंबर की शुरुआत हो चुकी है, नवंबर की शुरुआत के साथ ही दिल्ली, एनसीआर और हरियाणा-यूपी के निकटवर्ती जिलों में काली धुंध का आगमन शुरू हो गया है। आकाश में ये घने काले धुंध का आना कोई नयी बात नहीं हैं क्योंकि ये तो हर साल आते हैं हाँ लेकिन ये धुंध हर बार और जानलेवा अंदाज़ में आती है, अब दिल्ली में इस धुंध की चर्चाएं भी शुरू हो गयी हैं, अब स्कूल भी बंद होना शुरू हो जाएंगे, लोगों का मॉर्निंग वाक कुछ दिन बंद रहेगा, लोग घरों से निकलते वक़्त मास्क का इस्तेमाल करेंगे, सरकार-प्रशासन मिलकर कुछ दिन के लिए जागरूकता का खेल खेलेंगे तब तक ये धुंध अपना काम करके हमारे वातावरण में कहीं खो जाएगी, फिर हम भी इस धुंध को भूल जाएंगे। ये धुंध हर बार हमसे कुछ सवाल पूछ के जाते हैं, जिसका जवाब तो हमारे पास होता है लेकिन हम जवाब देना तो दूर उस धुंध का सवाल सुनना भी पसंद नहीं करते। सर्दियों के शुरू होते ही हमारे आकाश में घनी धुंध के बादल छा जाते हैं, हर साल इन्हीं महीनों में दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों की हवाएं जहरीली होने लगती हैं, दिल्ली का कलेजा अचानक से सुलगने लगता है। आखिर इसका कारण क्या है? इस सवाल का जवाब तो ढूँढना ही होगा?

हमारी प्रदूषण के मामले में चीन से नजदीकी प्रतिस्पर्धा चल रही है, जिसमें बहुत हद तक हमने बढ़त बना रखी है, अब ये हमारे लिए कितने गर्व या शर्म की बात है ये तो हमें ही बताना पड़ेगा, सरकार और प्रशासन इस गंभीर समस्या का सिर्फ और सिर्फ तत्कालीन हल ढूंढते हैं क्योंकि फिर कुछ दिनों बाद आकाश से ये धुंध छट ही जाएगी। हम इस समस्या का स्थायी हल क्यों नहीं ढूंढते जबकि ग्रीनपास की रिपोर्ट ने बताया कि वायु प्रदूषण की प्रतिस्पर्धा में हमने चीन को पछाड़ दिया है लेकिन चीन ने अपनी इस बदहाली का बहुत हद तक समाधान निकाल लिया है और हम इस प्रदूषण की प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने की होड़ में लगे हुए हैं। हम अब भी नहीं संभल रहे, जब ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर-2017’ के आंकड़ों ने इसमें हमें विजेता घोषित कर दिया, उनके आंकड़ों के अनुसार, भारत हवा में घुली गन्दगी से होने वाली मौतों के मामले में कुछ कदम और आगे बढ़ गया है और हमारा वायुमण्डल लगातार जहरीला होता जा रहा है।

जिस चीन से हमारी प्रदूषण के मामले में प्रतिस्पर्धा चल रही है, उसकी राजधानी बीजिंग में भी मंगलवार की सुबह दिल्ली के जैसे धुंध दिखाई दिए, लेकिन वहां इस धुंध का प्रभाव केवल आधे बीजिंग पर ही रहा, इसका सीधा मतलब है कि प्रदूषण का स्तर घातक नहीं था। चीन में शुक्रवार को ही प्रदूषण के इस स्तर तक पहुँचने का पूर्वानुमान लग गया था लेकिन सकारात्मक उपाय कर चीन ने इसे नियंत्रित कर लिया। हम चीन से प्रतिस्पर्धा तो कर रहे हैं लेकिन चीन से अच्छी चीज़ों की सीख नहीं ले पा रहे।

हमें इस बढ़ते प्रदूषण के कारकों को ढूँढना होगा और इसके समाधान का तरीका भी ढूँढना होगा। हमें प्रदूषण का स्थाई समाधान करना होगा, तात्कालिक समाधान कर हम बस इस वायु प्रदूषण को मौका दे रहें है और विकराल होने का। हम अभी भी ना चेते तो आने वाले वक़्त में इसका भयंकर परिणाम भुगतना होगा। हमारी जागरूकता ही हमें इस प्रदूषण से बचा सकती है। इस वायु प्रदूषण का सर्दी के शुरुआत में आने की समस्या कोई नया नहीं है, यह एक स्थायी समस्या है इसे हमें स्वीकारना होगा और इसका स्थायी हल ही हमें और हमारे आने वाली पीढ़ियों को बचा सकता है, तात्कालिक हल सिर्फ हमारे विनाश को कुछ पल के लिए टाल सकता है।

इस लेखक के और लेख

विद्या बालन का फिल्म प्रमोशनल नारीवाद

कविता- तुम जानती हो चुराए हुए चुम्बनों का स्वाद?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारा Youtube चैनल

पुराना चिट्ठा यहां मिलेगा

April 2026
S M T W T F S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
2627282930