Author: अभिषेक शुक्ल
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मैं इश्क़ में इंटर्न हूं
यार! तुम्हारा प्यारा न हुआ किसी मीडिया संस्थान की नौकरी हो गई है, जो किसी भी वक़्त बिना नोटिस फ़ायर हो सकती है. यार कमाल कमाल करते हो तुम भी. तुम कौन सा मुझे सरकारी नौकरी की तरह रिटायरमेंट तक पकड़ कर बैठे रहोगे, जहां कोई मुझसे बेहतर मिली पकड़ के निकल लोगे. नहीं यार अपनी कसम, तुम्हारे प्यार…
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ये इश्क़ तो नहीं है
इश्क़ का कॉन्ट्रैक्ट करोगे? सुनो! कहो! प्यार हुआ है कभी तुम्हें? हां! कई बार। और जिनसे तुमने प्यार किया, क्या उन्हें भी तुमसे प्यार था? प्यार वन साइडेड कब होता है यार? इश्क़ सौदेबाज़ी है। गाना नहीं सुनती? सुनती हूं पर इतना सोच नहीं पाती। वैसे मुझसे ये सब क्यों मुझसे पूछ रही हो? इश्क़…
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शहीद-ए-आज़म! हम भारतीय, बकवासी हैं।
भगत सिंह। नाम एक वाद अनेक। उन्हें राष्ट्रवादी भी उतना ही सगा मानते हैं जितना कि वामपंथी। पंथ का ज़िक्र इसलिए किया कि बिना इसके आजकल हमारे देश में डकार भी नहीं लिया जाता। आजकल तो पंथ की दौड़ सरपट चल ही रही है। अगर आप किसी पंथ के नहीं हैं तो आप बौद्धिक रूप…
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दंगाइयो की नज़रों से कब तक बचे रहेंगे गांव?
कॉलेज के आख़िरी दिनों में हमारे रहने का ठिकाना बना मेरठ के गंगानगर का एम ब्लॉक। जिस मकान में हम रहते थे उसी के बग़ल में एक आंटी जी रहती थीं। आंटी जी लीडर थीं। कोई न कोई महिला फ़रियादी उनके घर के बाहर अरदास लगाने पहुंची रहती। सप्ताह के किसी एक दिन आंटी जी…
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जापान से आया मेरा दोस्त चीन तुम डरा करो
हम हिंदुस्तानी दोस्ती में बहुत यक़ीन रखते हैं। हम दुश्मन को भी दोस्त मानते हैं। चाहे दोस्ती में सरहद पर महीने-दो महीने में आठ-दस सिपाही शहीद ही क्यों न होते रहें, हम दोस्ती से कभी पीछे नहीं हटते। दोस्ती वाली लिस्ट में उसी की रैंक सबसे अच्छी है जिसके एंटरटेनमेंट के चक्कर में हमारे सैनिक…
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मेरे देश में दूल्हा बिकता है
काका इलाक़े के बड़े ज़मींदारों में से एक है। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा इंजीनियर है, किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है। छोटा बेटा भी इंजीनियर है। लड़कियां भी नाम रोशन कर रही हैं। बड़ी लड़की प्राइमरी स्कूल में टीचर है, छोटी भी कहीं सरकारी नौकरी कर रही है। …
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सच कहोगे तो मरोगे: गौरी लंंकेश
गौरी लंकेश मार दी गईं। गौरी गुनाहगार थीं। धर्म की आलोचना करती थीं। कुलबर्गी की तरह उन्हें भी हिंदू दर्शन में ख़ामियां नज़र आती थीं। उनके लिखने से धर्म विशेष का अपमान हो जाता था। उन्हें जीने का हक़ नहीं था क्योंकि परंपराओं पर चोट करती थीं। भाजपा और संघ का अपमान करती थीं। गौरी…
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रागिनी को ससुराल वालों ने नहीं समाज ने मारा है
2 जून 2017 को रागिनी की शादी संतकबीर नगर के, बौरव्यास गांव में रहने वाले रामेश्वर पाठक के साथ होती है. बहुत अरमानों के साथ रागिनी के माता-पिता अपनी राजदुलारी बिटिया को विदा करते हैं. यथासंभव उनसे जो भी बन पड़ता है, वर पक्ष को दहेज देते हैं. विदाई के वक़्त उनकी नम आंखो में…
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आया मौसम चोरी का
आपने रुपये-पैसे की चोरी सुनी होगी, साहित्यिक चोरी सुनी होगी, हो सकता है पेटेंट या धुन चोरी के किस्सों से भी आप अनजान न हों । एक नए तरह की चोरी मार्केट में लांच हुई है ‘पुरस्कार चोरी।’ ये आपके जीवन भर की तपस्या को मार्केट में फुटकर के भाव बेचने का जन आंदोलन है…