Author: एडिटर
-

मंदसौर रेप: राजनीति से पेट नहीं भरा हो तो थोड़ा शर्म कर लीजिए
अगर अब नहीं चेते तो स्थिति और भयावह हो जाएगी और वो दिन दूर नहीं होगा जब ऐसे रेपकांड और ऐसे केस सीधे हमसे जुड़ने लगेंगे
-

बदनाम ही सही लेकिन गुमनाम नहीं हूं मैं: मंटो
विभाजन और विभाजन से होने वाले दंगे का मंटो पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा था. इस त्रासदी को मंटो के लिए सह पाना बहुत कठिन था. इसी कारण दंगो के दुष्प्रभाव का जितना मार्मिक चित्रण मंटो की कहानियों में मिलता है, उसे कहीं और ढूंढ पाना बहुत कठिन है
-

कैफी आजमी की पुण्यतिथि पर सुनिए उनके पांच कालजयी गीत
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में जन्में अख्तर हुसैन रिजवी उर्फ कैफी आजमी ने मात्र ग्यारह साल की उम्र में शायरी लिखनी शुरू कर दी थी. और किशोर होते-होते मुशायरे में शामिल होने लगे.
-

अन्ना हजारे का अनशन: इतिहास बनेंगे या इतिहास दोहराएंगे
अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन शुरू कर मोदी सरकार को ललकार दिया है. उनके अनुसार ये आंदोलन जनलोकपाल, किसानों की समस्याओं’ और चुनाव में सुधारों के लिए एक सत्याग्रह होगा
-
आखिर इतनी देर से क्यों जागा सुप्रीम कोर्ट?
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन रहे जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने बहुत पहले एक फैसला सुनाते हुए गालिब का एक शेर कहा था कि, मरते हैं आरजू में मरने की, मौत आती है पर नहीं आती! दरअसल, काटजू एक ऐसे केस पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें याचिकाककर्ता ने…
-
नौशाद अली: कभी फुटपाथ पर सोने वाला बन गया संगीत का जादूगर
भारतीय सिनेमा का एक दौर ऐसा भी था, जब फिल्में संगीत प्रधान हुआ करती थीं, यानि फिल्में अपने गीत और संगीत की वजह से सुपरहिट हो जाती थीं. उस दौर के संगीतकारों की लंबी फेहरिस्त है, लेकिन नौशाद अली के संगीत की बात ही कुछ अलग थी. हिंदी सिनेमा में जिन लोगों को संगीत का…
-

श्रीनिवास रामानुजन: गणितीय इतिहास की सबसे अबूझ पहेली
विश्व इतिहास पर यदि नजर डालें तो कुछ नाम ऐसे आएंगे जिन्होंने बेहद कम समय में अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया हो. 22 दिसम्बर 1887 को भारत के चेन्नई में जन्में श्रीनिवास रामानुजन ऐसे ही एक विलक्षण प्रतिभा के थे जिन्होंने 32 वर्ष की अल्पायु में दुनिया को विदा कहने से…
-
बहनों और भाइयों, मैं आपका दोस्त अमीन सायानी बोल रहा हूं…
तनु वेड्स मनु फिल्म के बिल्कुल शुरुआत में ही एक रेडियो में फरमाइशी कार्यक्रम चल रहा होता है जिसमें यह आवाज आती है, “बहनों और भाइयों नमस्ते, मैं आपका दोस्त अमीन सायानी बोल रहा हूं. स्वागत है आपके अपने ही फरमाइशी प्रोग्राम में. दोस्तों आज तो बहुत ही अच्छे-अच्छे और प्यारे गीतों की फरमाइशें आई…
-

बर्थडे स्पेशल: एक साल में चालीस फिल्में साइन करने वाला सुपरस्टार
भारतीय सिनेमा का अपना एक दौर रहा है. अपने उम्र की ढलान पर एक बार राजेश खन्ना किसी अवार्ड शो में अमिताभ बच्चन से अवार्ड लेने के बाद अपनी ही फिल्म का एक डायलाग बोलते हैं कि ‘ये भी एक दौर है, वो भी एक दौर था’. उस डायलाग में राजेश खन्ना सिनेमाई दौर के…
