Category: नेशनल
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उन्नाव रेप केस बताता है कि कानून सबके लिए एकसमान नहीं होता
एक लड़की राज्य के मुख्यमंत्री और सबसे ताकतवर नेताओं में से एक योगी आदित्यनाथ के पास गुहार लगाती है। आरोप है कि बीजेपी के एक विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके आदमियों ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया। वह सीएम आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश करती हैं तो मामले की आग मीडिया तक भी…
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आंबेडकर का रंग चाहे जितना बदलो ‘असली वाला’ 2019 में दिखेगा
2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हालत पतली होने के बाद नरेंद्र मोदी ने खुद को विकास-पुरुष के रूप में प्रोजेक्ट किया। ऊपरी तौर पर वह खुद को विकास पुरुष बताते लेकिन हिंदू वोटर्स कुछ अलग ही लक्ष्य हासिल होता देख खुश हो रहे थे। इन हिंदुओं में हर जाति के लोग शामिल थे।…
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आखिर कैसा हो आज के समय के आंदोलनों का स्वरूप?
जातियों और समुदायों के बीच बढ़ रही खाई के जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ हम हैं, ना की कोई सरकार, प्रशासन, पार्टी या नेता। हम खुद ही अपने बीच में विनाश के बीज बो रहे हैं, अंततः फसल भी कुछ उसी प्रकार की काटने को मिल रही है। कल तक सवर्ण जाति, पिछड़ों और दलितों को…
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क्या ममता दीदी, मोदी भइया का दिवाला निकालने में कामयाब हो जाएंगी?
नमस्कार मैं चकित पत्रकार! कुछ बातें हमारे कानों में चींटी की तरह हलती हैं और चुप्पी दाब के निकल जाती हैं. जब तक दिमाग कुछ सोचने का कष्ट करे तब तक मैटर डिसलोकेट हो जाता है. मैटर है ममता बनर्जी का. तीसरा मोर्चा. भले ही इस मोर्चे में 7 से ज्यादा बार मुर्चा(जंग) लग गई…
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अन्ना हजारे का अनशन: इतिहास बनेंगे या इतिहास दोहराएंगे
अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन शुरू कर मोदी सरकार को ललकार दिया है. उनके अनुसार ये आंदोलन जनलोकपाल, किसानों की समस्याओं’ और चुनाव में सुधारों के लिए एक सत्याग्रह होगा
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हरित क्रांति के नाम पर यूं कंपनियों के गुलाम बन गए किसान
देश में हर महीने 70 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर रहे हैं और ज्यादातर में आत्महत्या की वजह किसान पर बढ़ता कर्ज होता है। किसान कर्जमाफी की मांग को लेकर 180 किलोमीटर पैदल यात्रा भी करते हैं लेकिन कभी यह सवाल सामने नहीं आता है कि कर्ज की वजहें क्या हैं? और कब से ये…
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धीरे-धीरे भरोसा हो रहा है कि पार्लियामेंट में डकैत ही होते हैं
इरफान खान की फिल्म सामने चल रही थी, फिल्म में डायलॉग आता है, ‘ बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पाल्लियामेंट में।’ पान सिंह तोमर नाम की फिल्म के इस डायलॉग ने एक बार सोचने को मजबूर कर दिया। उस समय तो यह डायलॉग पसंद नहीं आया था लेकिन धीरे-धीरे खबरें पढ़ते और…
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भक्तो! मजबूर तुम हो, बीजेपी और अमित शाह नहीं
विकल्पहीनता धीरे-धीरे निरंकुशता को जन्म देती है। भारतीय राजनीति में भी एक बार फिर से यह प्रासंगिक हो चला है। इंदिरा-संजय गांधी की जोड़ी के बाद अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी भी हर जगह वही करती है, जो वो चाहती है। इंदिरा ने भी संगठन में खुद से बड़ा किसी को बनने नहीं…
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किसान मार्च: जीते हमेशा गांधी हैं, गोडसे कभी नहीं जीत सकता
11 मार्च 2018 को प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी संसद में बोलते हैं कि भारतीय राजनीति में सड़क के संघर्ष और धरना प्रदर्शनों की बहुत जगह नहीं रही गई है। अगले ही दिन उन्हें दिखाते हैं कि तरीका अगर गांधी वाला होगा तो सत्ता को संघर्ष के आगे झुकना ही पड़ेगा। महाराष्ट्र के 30,000 किसानों ने नासिक…

