Category: नुक्ताचीनी
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अन्ना हजारे का अनशन: इतिहास बनेंगे या इतिहास दोहराएंगे
अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन शुरू कर मोदी सरकार को ललकार दिया है. उनके अनुसार ये आंदोलन जनलोकपाल, किसानों की समस्याओं’ और चुनाव में सुधारों के लिए एक सत्याग्रह होगा
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धीरे-धीरे भरोसा हो रहा है कि पार्लियामेंट में डकैत ही होते हैं
इरफान खान की फिल्म सामने चल रही थी, फिल्म में डायलॉग आता है, ‘ बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पाल्लियामेंट में।’ पान सिंह तोमर नाम की फिल्म के इस डायलॉग ने एक बार सोचने को मजबूर कर दिया। उस समय तो यह डायलॉग पसंद नहीं आया था लेकिन धीरे-धीरे खबरें पढ़ते और…
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मूर्तियां तोड़ने/बनाने से विचारधारा खत्म/स्थापित हो जाती है?
त्रिपुरा में लेफ्ट और राइट की लड़ाई के कुछ प्रत्याशित परिणाम नजर आने लगे हैं। पहले बीजेपी नेता हेमंत बिस्व शर्मा ने त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री को केरल या बांग्लादेश चले जाने की सलाह दी फिर कुछ उपद्रवियों द्वारा त्रिपुरा के बेलोनिया में व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को ढहा दिया गया, जिसे एक बीजेपी नेता…
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त्रिपुरा में ढहा लाल दुर्ग, चुनावी रिंगमास्टर बने अमित शाह
भाजपा ने त्रिपुरा में वाम की ढाई दशक साल पुरानी सरकार से सत्ता छीन ली है। कई अन्य राज्यों की तरह यहां पर भी कांग्रेस का सफाया हो गया है। बीजेपी दो तिहाई सीट लेकर सरकार बनाने की ओर अग्रसर है।
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लड़कियों पर वीर्य फेंक होली को बदनाम मत करो
वीर्य से भरा गुब्बारा फोड़कर कहना कि बुरा न मानो होली है, कहाँ तक सही है? सुनने में बेहद सा अजीब है कि वीर्य से भरा गुब्बारा? हां, दिल्ली जैसे महानगर में होली के बहाने दिल्ली विश्वविध्यालय में पढ़ने वाली छात्रा पर सरेराह एक गुब्बारा फेंककर मारा गया जिसमें वीर्य भरा हुआ था, मौका था…
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SSC Protest: क्या परीक्षा के नाम पर हो रही है धांधली..!
सरकारों से सवाल पूछने पर छात्रों को हतोत्साहित किए जाने की परंपरा कितनी पुरानी है यह अलग विषय है पर अगर इसे शोध का विषय बनाया जाए तो यह शोधार्थियों के लिए दिलचस्प अवश्य हो सकता है। हतोत्साहन की यह प्रकिया की शुरुआत स्कूल से ही शुरू होती है जिसे अलग-अलग तरीकों से अंजाम तक…
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क्लिकबेट वाला मीडिया और मौत में दफन होते मुद्दे
एक गाना याद आ रहा है ‘भूल गया मैं सब कुछ, अब याद नहीं है अब कुछ’ यही हाल मीडिया का है। अब मीडिया भूल जाएगा कि कोई नीरव मोदी भी था और कोठारी तो अब कोठरी में बंद हो जाएंगे। जैसे मौत कोई ना कोई बहाना लेकर आती है इंसान के जीवन को खत्म…
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देहाती आदमी का प्रधानमंत्री को खुला पत्र! मुझे पइसा उधार दे दो..
प्यारे प्रधानमंत्री जी! कुछ लोग प्यार करते हैं. कुछ लोग कारोबार करते हैं. पहले वाले की जिंदगी रो-रोकर बीतती है. घर वाले चांप देते हैं. “देखो भइया रुपया पैसा बंद. अब हम तुम्हें घंटा नहीं देंगे. तुम खुस रहो अपनी मेहरारू के साथ.”कमासुत पूत हो तो भी डर जाता है. प्राइवेट कंपनी में नौकरी कितने…
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पॉलिटिकल लव: हमारे विकास का मुद्दा चुनावी नहीं है
तुम लव लेटर रोटोमैक से लिखते हो क्या क्यों क्या हो गया जी हुआ कुछ नहीं बस तुम्हारे लेटर में काफी घोटाले नज़र आ रहे हैं.
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पॉलिटिकल लव: प्यार के बजट की समीक्षा
इस बार कहाँ जा रहे हो कासगंज जाने की सोच रहा हूँ क्यों तुमको भी अपनी रोटियां सेंकनी है वहाँ ! अरे बाबा बस वहाँ दुबारा प्यार भरना है
