Breaking News |

Category: नुक्ताचीनी

  • क्या महिलाएं युद्ध का कारण हैं?

    क्या महिलाएं युद्ध का कारण हैं?

    आज सुबह मैं पार्क में व्यायाम करने के उपरांत कुछ देर सुस्ताने के लिए बैठ गया। वहां कुछ बुजुर्ग पुरुष महिलाओं के विषय में चर्चा कर रहे थे। उनमें से एक महानुभाव ने कहा-“आज तक जितने भी युद्ध हुए हैं वह सभी महिलाओं के कारण हुए हैं !” वहां खड़े सभी लोग प्रतिकार की बजाए…

  • यूपी: चुनाव खत्म होते ही लगा 15 पर्सेंट का करंट

    यूपी: चुनाव खत्म होते ही लगा 15 पर्सेंट का करंट

    यूपी के निकाय चुनावों में काउंटिग से पहले ही बिजली के बढ़े दामों ने आम जनता को ‘छुआ’ दिया है। एकदम भन्न से घोषणा की गई है कि शहरी उपभोक्ताओं के लिए बिजली के दामों में 12 से 15 पर्सेंट तक की बढ़ोतरी की जा रही है। जाहिर है, अगर यही कदम चुनाव से पहले…

  • पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में कुछ विवाद करते हैं

    तुम भी भारतीय रेल हो गए हो अरे क्या हुआ ऐसे क्यों बोल रही हो? जब देखो जब तुम्हारी हालत खस्ता ही नजर आती है. हाहाहा, कहो तो वास्कोडिगामा बन जाऊं रहने दो आज वो भी पटरी से उतर गए. अच्छा तुम मुझसे कितना प्यार करते हो? उतना ही जितना पाकिस्तान हाफिज सईद से, यानी…

  • क्रांति धरा मेरठ: सिर्फ तीस मार खां बसते हैं यहां!

    क्रांति धरा मेरठ: सिर्फ तीस मार खां बसते हैं यहां!

    क्रांतिधरा मेरठ ऐंवई नाम के साथ बदनामी लेकर नहीं चल रही है। एक से एक तीस मार खां बसते हैं यहाँ। ताज़ा उदाहरण सरधना के सोम साहब हैं। अब पता नहीं किस झोंक में जनाब ने 5 करोड़ का इनाम भंसाली के सिर पर रख दिया। ऐसे ही कुछ साल पहले मेरठ में, एक कुरैशी…

  • विश्व टेलिविजन दिवस: बचपन में टीवी देखने किसके यहां जाते थे?

    विश्व टेलिविजन दिवस: बचपन में टीवी देखने किसके यहां जाते थे?

    अब के बच्चों के लिए टीवी पर दर्जनों कहानियां हैं. इतनी कि वो जिन्हें चाहें देख-सुन सकते हैं, छोड़ सकते हैं और कोई पसंद न आए तो अपने मिजाज से पैकेज ले सकते हैं लेकिन उनके पास शायद ही टीवी की अपनी कोई कहानी हो, वो कहानी जिसमें टीवी महज एक सूचना और मनोरंजन का…

  • सबकुछ ठीक हो जाएगा बस खुद को शून्य बना लीजिए…

    सबकुछ ठीक हो जाएगा बस खुद को शून्य बना लीजिए…

    एक से एक इवेंट हो रहे हैं हमारे देश में, कुछ सफल हो जाते हैं और कुछ असफल। हाल ही के वर्षों में बहुत से इवेंट हुए हैं और अभी आगे देखना बाकी है कौन कौन से इवेंट होंगे या होने वाले हैं। जैसे किसी मूवी का ट्रेलर आता है, बाद में मूवी पर इनका…

  • विद्या बालन का फिल्म प्रमोशनल नारीवाद

    विद्या बालन का फिल्म प्रमोशनल नारीवाद

    विद्या बालन का हालिया बयान उस समय तक एकदम सच लग रहा था, जब तक यह नहीं पता था कि उनकी फिल्म भी आने वाली है। पता चली कि विद्या की फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ रिलीज होने वाली है। विद्या फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में या यूं कहें ट्रेंड फॉलो करते हुए तथाकथित रूप से…

  • पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में कुछ राष्ट्रीय करते हैं

    पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में कुछ राष्ट्रीय करते हैं

    चलो प्यार में कुछ राष्ट्रीय करते हैं हां सोच रहा हूँ प्यार में राष्ट्रीय भोजन ले आऊँ लेकिन देखना खिचड़ी जैसा बोरिंग भोजन मत ले आना तुम बीमार थोड़ी हो जो तुम्हें खिचड़ी खिलाऊँ आज कल बड़े-बड़े फैसले लेने लगे हो, क्या बात है? बस कुछ बदलाव का मन कर रहा था चलो सही है…

  • जब चौथे खंभे की हुई सेल्फीमय मौत

    जब चौथे खंभे की हुई सेल्फीमय मौत

    उस सेल्फी में एक खंभा था। वो कोई आम सेल्फी नहीं थी, सेल्फी लेने वाला और सेल्फी देने वाला दोनों एक-एक खंभे के रखवाले थे। ये दोनों खंभे एक-दूसरे पर नज़र रखने वाले थे लेकिन सेल्फी में दोनों की नजर सिर्फ कैमरे पर थी और पूरा फोकस स्माइल और मुँह बनाने पर था। उस सेल्फी…

  • मीडिया का ग्लैमर और वास्तविकता

    मीडिया का ग्लैमर और वास्तविकता

    लाइट कैमरा एक्शन के साथ शुरू होने वाली हर चीज़ मूवी नहीं होती। एंकर हो या रिपोर्टर एक विशेष आवाज के साथ अपना प्रोग्राम शुरू करते हैं। रंगों से भरी ये दुनिया शायद हर आम आदमी को अपनी ओर खींचती है। मीडिया लाइन का आकर्षण ही ऐसा है कि आप भी इसके मायाजाल से बच…