26/11: कब होगी मुंबई हमले के मास्टरमाइंड पर कार्रवाई?

26 नवंबर, दिन बुधवार, वो काली रात कोई भारतीय कैसे भूल सकता है? उस रात कुछ आतंकियों ने मायानगरी मुम्बई के कुछ प्रसिद्ध जगहों पर हमला कर दिया था. देखते-देखते सबके सामने एक खौफनाक मंजर था. कई जगहों पर कुछ समय के अंतराल पर दर्जनों धमाके और गोलीबारी शुरू हो गए थे. चारों ओर दहशत का माहौल था, किसी को भी समझ नहीं आ रहा था आखिर ये हो क्या रहा है. मुम्बई के कलेजे को छलनी करने आये ये आतंकी एक बेहद ही भयानक दर्द दे गए जो आज भी रह-रह के देश के सीने में उठता रहता है.

अगले दिन सुबह टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ चल रहा था कि ये हमला भारत में आज तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला है. करीब तीन दिनों तक टीवी पर टकटकी लगाये हम सिर्फ और सिर्फ यही देख रहे थे कि अब क्या होगा, अब क्या होगा?

करीब तीन दिनों बाद जाकर पता चला कि इस आतंकी हमले से निपट लिया गया है, लेकिन उस दर्द का एहसास तो हमेशा ही रहा. खबरों की माने तो 26 नवंबर की रात को मुम्बई में अलग-अलग जगहों पर आतंकियों के करीब 16 गुट मौजूद थे, सब इस वारदात को अलग-अलग अंजाम देने में लगे हुए थे. इन सभी के पास भारी मात्रा में एके 47 राइफल और ग्रेनेड थे.

कुछ आतंकी छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) रेलवे स्टेशन के यात्री हाल में पहुँच कर मासूम लोगों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी. इन सब से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 200 एनएसजी कमांडो, सेना के 50 कमांडो और सेना की 5 टुकड़ियां भेजी थी.

26 नवंबर की रात होटल ताज में छुपे आतंकियों ने अचानक से फायरिंग और धमाके करने शुरू कर दिए वहां अफरा-तफरी का माहौल हो गया. इसके बाद कुछ आतंकी होटल ओबेरॉय में हमले शुरू किये उसकी अगली सुबह नरीमन हाउस में गोलीबारी शुरू हो गयी.
सुरक्षाबलों का ये अभियान ख़त्म होने में तीन दिन लग गए 29 नवंबर की सुबह जा कर आतंकियों को मार गिराया गया और एक आतंकी को ज़िंदा पकड़ा गया.

इन तीन दिनों तक पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा था, भारत में लगी आग को देख रहा था, पूरा भारत सुन्न पड़ा हुआ था. हर जगह मंदिरों, मस्ज़िदों, चर्चों और गुरुद्वारों में लोग दुआएं मांग रहे थे. वो एक ऐसा मंजर था जिसे देख-सुन कर हर भारतीय की आँखे नम थीं.

इस आतंकी हमले में लगभग 237 आम लोगों के अलावा आतंकरोधी दस्ते के 11 जाबांज शहीद हुए थे, जिनमें से कई अधिकारी थे. सब जाबांजों ने अपनी जान की बाजी लगा दी लोगों की सुरक्षा में. आतंकरोधी दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे, मुठभेड़ विशेषज्ञ उपनिरीक्षक विजय सालस्कर, अशोक कामटे, सदानंद दाते, मेजर कमांडों संदीप उन्नीकृष्णन, निरीक्षक सुशान्त शिंदे, नानासाहब भोसले, तुकाराम ओंबले, प्रकाश मोरे, दुदगुड़े, विजय खांडेकर, जयवंत पाटिल, योगेश पाटिल, अम्बादोस पवार तथा एम सी चौधरी इस अभियान में शहीद हो गए. इन सभी जांबाजों को देश हमेशा याद रखेगा. इनकी बहादुरी के कारण बहुत से मासूमों की जान बच गयी.

कुछ दिन बाद इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा नामक एक आतंकी संगठन के मुखिया ने ले ली. इस हमले का मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज सईद जिस पर अमेरिका ने इनाम रखा है, अब पाकिस्तान ने उसको क्लीन चिट दे दी है. हाल ही में लाहौर हाईकोर्ट ने हाफिज को नजरबंदी से रिहा करने का आदेश दे दिया. इसका मतलब यही हुआ कि पाकिस्तान के साथ साथ अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत द्वारा कई सबूत देने के बावजूद मुंबई हमले के मास्टरमाइंड पर कोई कार्रवाई नहीं होने वाली है. आतंकवाद पर दोहरा रवैया किस हद तक चलेगा, कुछ पता नहीं.

देश ने हमले का दंश तो झेल लिया लेकिन अभी भी इंसाफ के लिए इंतज़ार ही करना पड़ रहा है. सरकारें बदल गईं 9 साल का वक़्त भी गुज़र गया लेकिन उन आकाओं के सिर्फ एक एजेंट, अजमल कसाब को ही हम फांसी पर लटका पाए हैं. आज भी उसका असली गुनाहगार खुलेआम पड़ोसी मुल्क में घूम रहा है.

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