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साइबर हमलों से निपटने में पिछड़ती दुनिया

साइबर हमला एक गंभीर संकट का रूप धारण करता नजर आ रहा है। आए दिन अधितम प्रभावी साइबर हमले हो रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि इन हमलों को होने से रोकने में दुनिया के सर्वाधिक तकनीक सम्पन्न देश भी नाकाम साबित हो रहे हैं। ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में साइबर हमले कितने हानिकारक साबित हो सकते हैं।

 

साइबर हमलों को लेकर सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि अगर कुख्यात आतंकी संगठन भी साइबर हमले करने में दक्ष हो जाते हैं तो वाकई यह दुनिया को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। फिलहाल जो साइबर हमले हो रहे हैं, उनमें ज्यादातर यही देखने में रहा है कि हमले के बरक्स फिरौती के रूप में धन की उगाही करने का प्रयास हो रहा है। इसलिए यह आसानी से समझा जा सकता है कि बहुत ज्यादा समय नहीं लगेगा, जब पैसे के लिए साइबर हमला करने वाले लोगों को आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन अपनी ओर लुभा लेंगे।

 

ऐसा नहीं है कि दुनिया भर की सरकारों को इन साइबर हमलों की भयाहवता का अंदाजा नहीं है या फिर वे इससे निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं कर रही हैं। बल्कि सभी को इन हमलों की गंभीरता अंदाजा है और इन्हें रोकने के प्रयास भी किए जा रहे हैं लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल रही है। देखने में यह आ रहा है कि जब तक किसी साइबर हमले में प्रयोग में लाए गए वायरस से निपटने में कामयाबी मिल रही है तब तक हमलावर नए वायरस डेवलप कर दे रहे हैं।

बात अगर भारत की करें तो भारत भी लगातार ही साइबर हमलावरों के निशाने पर रहा है। खासतौर से चीन को कंप्यूटर तकनीक के क्षेत्र में काफी विकसित माना जाता है। ऐसे में इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सीमा पर भारतीय सैनिकों को तंग करने वाला चीन कभी भी साइबर अटैक का सहारा ले सकता है। ऐसे में अभी समय है कि भारत सरकार देश को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने में हर संभव प्रयास करे। जरूरत के अनुसार इसमें बेझिझक विकसीत देशों की हर संभव मदद ली जाए।

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