जातीय लड़ाई में उलझता जा रहा है भारत का युवा

पुणे के भीमा-कोरेगांव से शुरू हुई जातीय हिंसा का असर महाराष्ट्र सहित पूरे देश में दिखने लगा है। सोमवार को हुई हिंसक घटनाओं ने इस देश में सभी को चिंतित होने पर मजबूर किया है। इस जातीय संघर्ष का मुख्य कारण 200 साल पुराना इतिहास है, जिसपर दो जातीय समुदाय अपनी-अपनी गरिमा के लिये हिंसा का सहारा ले रहे हैं, बुधवार को बुलाए गए बंद के दौरान राज्य सरकार की सख्ती के बीच कोई बहुत बड़ी अप्रिय घटना तो नहीं हुई लेकिन लेकिन मुम्बई, पुणे सहित 18 जिलें लगभग बंद ही रहे, जिसके परिणामस्वरूप व्यापार से लेकर स्कूल तक प्रभावित रहे।

ये जातीय हिंसा हमारे समाज की खामियों को बयान करने के लिये काफी है, 200 साल पुराने इतिहास के लिये आज हिंसा करना कहाँ तक जायज है? हमारा देश नौजवानों का देश है, हमारा देश दुनिया का सबसे युवा देश है और आज एक सच ये भी है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में हुई जातीय हिंसक घटनाओं में युवाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है। जो युवा राष्ट्र निर्माता कहलाता है आज वही हिंसा का सहारा ले रहा उस इतिहास की गरिमा के लिए जिसके बारे में उसे ठीक ढंग से जानकारी भी नहीं है। उसे अपने वर्तमान या भविष्य की चिंता से ज्यादा अपने गौरवपूर्ण इतिहास की चिंता है। ऐसी घटनाएं शुरू होते ही इतिहास की जानकारियां अचानक से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगती हैं। व्हाट्सएप्प, फेसबुक के जरिये सही-गलत सारी मिलावटी मसालेदार जानकारियां जो युवाओं में उबाल ला सके मिलनी शुरू हो जाती हैं और युवा बढ़-चढ़कर इन जानकारियों को प्राप्त करते हैं।

 

ये सारी घटनाएं हमें चिंतित होने पर विवश करती हैं। जिस समाज को हम युवाओं के जरिये आदर्श समाज बनाने का ख्वाब पालते हैं उसी का एक बड़ा युवावर्ग समाज को अंधकार की ओर ले जा रहा है। कुछ हद तक इसमें बेरोजगारी का का भी हाथ है क्योंकि वर्तमान समय में बेरोजगारी बढ़ने से युवा एक दूसरे समुदायों को कोसते में पीछे नहीं रहते हैं। समाज में जाति-समुदायों के बीच की खाई बढ़ती ही जा रही है। जिस उम्र में युवाओं का राष्ट्र के निर्माण में योगदान होना चाहिये उस उम्र में युवा भटक कर गलत कदम उठा रहे हैं। अगर हम अपने वर्तमान से ज्यादा अपने इतिहास की चिंता करेंगे तो हमारा भविष्य अंधकार की ओर जाने लगेगा। आज युवाओं को इतिहास से ज्यादा महत्त्व अपने वर्तमान और भविष्य को देना अतिआवश्यक है। हमें इतिहास की अच्छी यादों को वर्तमान में साथ लेकर एक प्रकाशमयी भविष्य की ओर बढ़ना चाहिये एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान देना चाहिये।

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