तस्वीर साभार: पत्रिका.कॉम

इंटरव्यू: खुद के बारे में क्या सोचते हैं चुनावी वादे?

नमस्कार आप सभी का स्वागत है लोकल डिब्बा पर और मैं आपके साथ हूँ फलाना जी। आज हमारे साथ एक ऐसे मेहमान हैं, जो चुनाव के वक़्त सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं। वैसे तो वह किसी परिचय के मोहताज नहीं है लेकिन आप बिना परिचय सुने कहाँ मानने वाले हैं, तो इसी बात पर उनका नाम बता देते हैं। उनका नाम है ‘वादे जी’, और लोग इन्हें के जुमले के नाम से भी जानते हैं। आज हम इनकी बातों को समझने की कोशिश करेंगे, तो चलिए अब सवाल-जवाब की ओर चलते हैं।

फलाने- नमस्कार वादे जी आपका स्वागत है लोकल डिब्बा पर।
वादे जी- नमस्कार फलाने जी।

फलाने- वादे जी सभी सरकारें आपको पूरा करने का की कसम क्यों खाती हैं?
वादे जी- अपने सुना ही होगा, जिसकी झूठी कसम खाओ वह मर जाता है तो सरकारें चुनाव के बाद सबसे पहले मुझे ही मार देती है, क्योंकि मैं पूरा हो ही नहीं सकता। एक बार को खयाली पुलाव सच हो सकते हैं पर मैं यानी वादे कभी पूरे नहीं हो सकते।

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फलाने- सर बुरा नहीं लगता कि आप कभी पूरे नहीं हो पाते?
वादे जी- बुरा तो लगता है लेकिन दुनिया में कौन सा काम पूरा होता है यही सोच कर अपने आप को तसल्ली दे लेता हूँ।

फलाने- सर आपको नहीं लगता कि नेता लोग आपको लेकर कुछ भी बोल जाते हैं?
वादे जी- अब उनका तो काम ही है बोलना, मुझे तो ये समझ नहीं कि आता लोग कैसे उनकी बात को मान लेते हैं।

फलाने- आपका नाम जुमला कैसे पड़ा सर?
वादे जी- बात 2014 की है, जब नेता लोगों ने ऐसी-ऐसी बातें बोल दी कि भगवान भी उतर आएं तो हमें पूरा न कर पाएं लेकिन कुछ दिन बाद उन्हें समझ आ गया कि हम पूरे न हो सकते इसलिए हमारा नाम ही बदल दिया, आप तो जानते ही हैं कि यह सरकार नाम बदलने में कितनी तेज है।

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फलाने- सर आजकल आपके नाम पर बहुत कुछ फ्री कर देते हैं, जैसे कि Wi-Fi फ्री, क्या लगता है आपको इसपर?
वादे जी- ये जो फ्री वाली बात है, ना फलाने जी, यही तो आपको लेकर डूबती है। इसे देखकर आप लोग बिना सोचे समझे वोट करते हैं और भूल जाते हैं कि जिसकी बात हो रही है, उसका बेसिक भी हमारे पास नहीं है और उसके बेसिक को ही पूरा होने में 5 से ज्यादा साल लग जाएंगे लेकिन आप लोगों को बस एक ही शब्द दिखता है वो है ‘फ्री’।

फलाने- सर नेता लोग बोलते हैं कि आप पर ध्यान न दे कह दी जाती हैं कई बातें!
वादे जी- फलाने जी यही कई बातें इन नेताओं को चुनाव जिता देती हैं और जब इनका काम निकल जाता है तो सबसे पहले आप लोगों का ध्यान इन्हीं बातों से हटाते हैं।

फलाने- आपकी इसी बात से एक सवाल निकलना है कि आपसे ध्यान भटकाने के लिए नेता लोग क्या करते हैं?
वादे जी- हर बार तो नेता ध्यान नहीं भटकाते हैं, कई बार तो आप लोग खुद ही भूल जाते हैं कि नेता जी क्या-क्या वादा कर दिए थे लेकिन कुछ बातें जो आपको याद रहती हैं तो उसके लिए तो राम मंदिर है।

फलाने- आखिरी सवाल आपसे, क्या कभी आप पूरे हो सकते हैं?

वादे जी- आपके इस सवाल का जवाब के लिए मैं एक सवाल आपसे करता हूँ, क्या नेता कभी झूठ बोलना छोड़ सकते हैं? जो जवाब इस सवाल का होगा वही मेरा जवाब होगा।

शुक्रिया वादे जी, आपका दुख सुनकर मेरी भी आंखों में पानी आ गया। मैं इसके बाद में नेता लोग से अपील करना चाहूंगा कि वे वही वादे करें, जिससे वादे जी पूरे हो सके और मैं जानता से बोलना चाहूंगा कि वह नेता के किए गए वादों को याद रखे। क्योंकि वादे जी को नेता ही नहीं जनता भी चुनाव के बाद भूल जाती है।

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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