तुम प्यार की रक्षा के लिए क्या करोगे? मैं भी लाल किले पर यज्ञ करूँगा। अरे! उससे क्या? बस एयर पॉल्यूशन ही बढ़ेगा, अरे! ऐसा […]
हरित क्रांति के नाम पर यूं कंपनियों के गुलाम बन गए किसान
देश में हर महीने 70 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर रहे हैं और ज्यादातर में आत्महत्या की वजह किसान पर बढ़ता कर्ज होता है। किसान […]
दुख हूं मैं एक नए हिन्दी कवि का, मुझे कहां बांधोगे किस लय, किस छन्द में?
जब भी हिंदी का कोई बड़ा स्तंभ डगमगाता है तो ऐसा कहा जाता है कि विराट शून्य हो गया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. सच भी है.
धीरे-धीरे भरोसा हो रहा है कि पार्लियामेंट में डकैत ही होते हैं
इरफान खान की फिल्म सामने चल रही थी, फिल्म में डायलॉग आता है, ‘ बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पाल्लियामेंट में।’ पान […]
भक्तो! मजबूर तुम हो, बीजेपी और अमित शाह नहीं
विकल्पहीनता धीरे-धीरे निरंकुशता को जन्म देती है। भारतीय राजनीति में भी एक बार फिर से यह प्रासंगिक हो चला है। इंदिरा-संजय गांधी की जोड़ी के […]
किसान मार्च: जीते हमेशा गांधी हैं, गोडसे कभी नहीं जीत सकता
11 मार्च 2018 को प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी संसद में बोलते हैं कि भारतीय राजनीति में सड़क के संघर्ष और धरना प्रदर्शनों की बहुत जगह नहीं […]
बिना बात के बोलने वाले PM मोदी, SSC घोटाले पर म्यूट क्यों हो गए हैं?
जब संस्थाओं का मानवीयकरण होता है तो उसकी प्रशंसा और अनुशंसा दोनों इंसानों की तरह होने लगती है. फिर जिन प्रक्रियाओं से इंसान गुजरता है […]
ना सुबह से एक आलू बिका है, ना बिका एक कांदा
”ना सुबह से एक आलू बिका है और ना बिका एक कांदा” ये एक फिल्मी डायलॉग है लेकिन यही आज के किसानों की हकीकत भी […]
पॉलिटिकल लव: चलो बिना बहुमत की सरकार बनाते हैं
कल तुम मुझे इग्नोर करके आगे क्यों चले गए? अरे वो दोस्त से मिलना था, तुम तो रोज ही साथ रहती हो, नहीं लग तो […]
अबकी बार बलात्कारियों को नहीं माफ करेगी राज्य सरकार
बलात्कार पर जब भी कोई कठोर कानून बनाने की मांग होती है, तब बुद्धिजीवियों में से ही तमाम लोग सामने आकर विरोध करने लगते हैं. […]