पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में सब पलट देते हैं

चलो प्यार में सब कुछ पलट देते हैं
अरे पलटने की बात मत करो, अभी ट्रेन ने पलटकर मेरा दिल दहला दिया है
अरे बाबा मैं कुछ और सोच रहा था
अरे रहने दो दिखावटी बदलाव नहीं करना
सही बोल रही हो, पता चले दूध तो पहुंच गया ट्वीट करने पर इंसान ही नहीं बचा
तुम मेरा पूरा ख्याल रखना, पता चले मुझे खोने के बाद तुम आंसू की बूंदें गिनो
अरे ऐसा न बोलो मैं आकड़ो में विश्वास नहीं करता

एक बात बताएं तुम्हें,
हां बोलो
एक गाना याद आ रहा है आज
अच्छा कौनसा ?
तू किसी रेल सी गुज़रती है मैं किसी पुल सा थरथरता हूँ
ज्यादा थरथराओ नही भारतीय पुल है टूट जाएंगे,
सही बोल रही हो, पता चले बाद कहीं प्यार भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया, हाहाहा

तुम कभी कुछ नया भी किया करो
क्या नया करूं बोलो तो रात में दुपट्टा ओढ़ कर बाहर निकलूं जैसे किरण बेदी निकली थी
निकलो लेकिन चंडीगढ़ में निकलना तब जानू
सब समझ रही हूँ, विकास तो चंडीगढ़ में है और बेदी जी कहीं और ढूढ़ रहीं हैं,
और मैं भी तो तुम्हारे बगल में हूं जबसे फ़ोन में ढूढ़ रही हो,

अगर तुम मेरे लिए चोकलेट नहीं लाये तो रिश्ता खत्म
अरे बाबा तुम बिलकुल अमेरिका वाली भाषा बोल रही हो
अच्छा मैंने कौनसा वर्चस्व दिखा दिया जो अब बात यहां तक आ गई
अरे अमेरिका ने बोला जब ड्रोन लोगे तब रिश्ते मजबूत होंगे,
और तुम भी बोल रही हो चोकलेट होगी तब मजबूत होंगे

अरे बाबा तुम बातों को एकदम घुमा देते हो
घुमाते तो नेता है मैं तो बस प्यार करता हूँ , लव यू बाबू
मुझमे तुम किस तरह बसे हो कुछ बता सकते हो
वैसे ही जैसे डेंगू और स्वाइन फ्लू देश में
यानि जान जाने पर ही छोड़ेंगे
बिलकुल लेकिन मै तुम्हे बीमार नहीं करूंगा प्यार करूंगा

चलो हम प्यार में सबको मिला कर आगे चलते है
क्यों तुमको भी कोई सांझी विरासत बचानी है
अरे तुम कौन सा भाग कर अपनी अक्स के पास जा रहे हो
अच्छा जी लेकिन नीतीश जी तो निकल लिए
तो तुम अगर निकले तो याद रखना आडवाणी से भी बुरा हाल करूंगी
अच्छा यानि शरद यादव बना दोगी
हाहाहा, कुछ ऐसा ही समझ लो
अरे मैं कहीं नहीं जा रहा लव यू

चलो कहीं घूम कर आते है कुछ नए लोगो से मिल कर आते है
अच्छा चलो गोरखपुर ही हो आते है जो परेशान है उनको थोड़ा प्यार देकर आये
अरे रहने दो पता चले गए थे मिलने सरकार पिकनिक घोषित कर दे
हाहाहा, सही बोल रही हो सरकार बस मुद्दा भटकाने का मौका देखती है

तुम आज कुछ थम सी गयी हो , बारिश हुई है क्या
अरे मै कोई दिल्ली की सड़क थोड़ी न हूं जो बारिश के बाद थम जाऊं
फिर क्या हुआ बाबू तुम तो ट्रैफिक में फंसी गाड़ी सी शांत लग रही हो
अरे कुछ ऐसा ही समझ लो मन की गाड़ी समय के बीच फंस गयी है
इतना सीरियस न हो बाबू इतना तो एमसीडी भी नहीं है, हाहाहा
तुम न मुझे सरकार बना कर ही दम लोगे
बिलकुल सरकार बनाऊंगा लेकिन अपने दिल की सरकार
यू आर सो स्वीट, लव यू बाबू

आज तुम कुछ ज्यादा सीरियस हो गई हो लगता है चाइना बॉर्डर पर तुम्हे भेज देना चाहिए
अरे बस करो तुम, हरदम मजे लेते रहते हो
अच्छा चाइना छोड़ो लोकल नगरी चलोगी
हां चलो, वैसे ये कहां है
जहां पॉलिटिकल लव होता है
अच्छा लोकल डिब्बा पर, चलो बाबू मै रेडी हूं

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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