पॉलिटिकल लव: प्यार में ऑक्सीजन कम ना होने पाए…

तुम मुझे कितना चाहते हो?
उतना ही जितना लोग ऑक्सीजन
अरे रहने दो ऑक्सीजन का नाम भी मत लो, मासूमों का चेहरा सामने आ जाता है।
अरे बाबा मैं सरकारों की तरह लापरवाह नहीं हूं और न ही कम्पनी की तरह लालची की जान की कीमत न समझूं।
आई नो बाबु कि तुम वैसे नहीं, जैसे वो लोग है।
हां मैं बिलकुल वैसा नहीं हूं मैं जान जाने के बाद मीटिंग नहीं करता, जान न जाए, तुम नाराज न हो जाओ इसके लिए पहले से तैयार रहता हूं।
आई नो बाबू तुम न लापरवाह हो और न ही नौटंकीबाज़

अच्छा सुनो हमारा तुम्हारा साथ कब तक रहेगा?
अरे बाबा जनम-जनम का रहेगा, तुम भी ना!
अरे बस ऐसे ही पूछ लिए, पार्टी बदलते ही नितीश बदल गए मैंने सोचा कहीं तुम भी बदल गए तो?
अरे बाबा मैं तो तुम्हारी लव वाली पार्टी में ही हूं,
अब अच्छा लग रहा है नहीं तो अभी तक शरद यादव-सा इनसेक्योर फील कर रही थी।
तुम भी न एकदम पागल हो …

अरे तुम मुझे एक बात बताओ?
हां बोलो जानेमन क्या हुआ?
तुम मुझ से खुल कर बात कर पाते हो न, मतलब कुछ ऐसा तो नहीं जो सामने न बोल पाते हो?
अरे बाबा अब रिश्ता दिल से है, और मैं बिलकुल दिल से और सामने से निभाता हूं।
अरे मैंने सोचा अगर तुम कुछ बोल नहीं पाते तो ‘सराहा’ पर आईडी बना लूं।
अरे तुम ना पगला जाती हो मतलब भेड़ चाल चलने लगती हो,
हाहाहा

अरे तुम मुझसे कितना डरते हो।
उतना ही जितना ‘द ब्लू व्हेल गेम’ से डरता हूं।
अरे बाबा तुम तो एकदम खौफ में हो मेरे,
हाहाहा
तुम भी तो ‘द ब्लू व्हेल गेम’ के एजेंट की तरह धमकी देती हो।
अरे बाबा दोनों दिखावटी हैं, डरो नहीं और डर को खत्म करो।
अच्छा तुम्हें याद है जब हमारी आंखे एक दूसरे से मिली थीं?
याद है लेकिन तुम्हे पता है उस वक़्त मेरी आंखों में बहुत पानी था।
क्यों बाबू क्या हुआ था?
यहां हमारी आंखे टकरा रही थी और वहां दो ट्रेन आपस में टकरा गई थी।
याद है बाबू तभी तुम रोते-रोते मेरे गले लग गए थे।

अच्छा अब ये बताओ की हम डेट पर कब चल रहे हैं?
सोच रहा हूं राम मंदिर मुद्दे का फैसला हो जाए तब चलें।
अरे बस साफ़-साफ़ बोलो ना कभी नहीं जाना।
कितना जल्दी पकड़ लेती हो तुम बातों को।
तुम्हारे साथ रह कर यही सब सीख रहे हैं,
हाहाहा

पता है आज़ादी का दिन आने वाला है।
क्या हुआ घर वाले मान गए क्या शादी के लिए?
अरे बाबा मैं तो 15 अगस्त की बात कर रही हूं।
अरे बस जैसे नाम के लिए तुम्हारे घर वाले हां करे हैं, वैसी ही ये आज़ादी भी है।
हां सही बोल रहे हो वहां घर वाले पागल बना रहे हैं, यहां सरकारें…

तुमसे एक बात बोलनी थी।
हां बोलो जानेमान,
मैं तुम्हारे प्यार में पूरी तरह से डूब चुकी हूं,
अरे तुम भी बाढ़ की चपेट में आ गयी क्या?
हाहाहा
हां लेकिन तुम मुझे संभाल लेना बस वादा करके मत रह जाना
चलो कहीं दूर चलते हैं।
कहा चलना है बोलो?

अपने लोकल अड्डे पर
उसके लिए तो लोकल डिब्बा पकड़ना होगा, जल्दी चलो लेट न हो जाएं
अच्छा पकड़ो मेरा हाथ, भाग के पकड़ लेंगे अपना लोकल डिब्बा।

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

इस लेखक के और लेख

पॉलिटिकल लव: थोड़ा इंटरनेशनल क्यों नहीं होते तुम?

पॉलिटिकल लव: बीपीएल कार्डधारी प्यार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारा Youtube चैनल

पुराना चिट्ठा यहां मिलेगा

April 2026
S M T W T F S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
2627282930