आर्टिकल 370 पर शोर करके बेवकूफ बना रहे हैं कश्मीरी नेता?

प्रैक्टिकली सोचें तो आर्टिकल 370 होने या ना होने से आम जनता को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है. अगर महबूबा मुफ्ती या फारूक अब्दुल्ला इसे फिर से लागू
कराने की बात कहें तो यह भी लगभग असंभव है.

बौखलाया, खिसियाया, गिड़गिड़ाया पाक लेकिन आप क्यों खुश हैं?

आजादी की लड़ाई दोनों ओर के लोगों ने मिलकर लड़ी. कायदे से हर अच्छी-बुरी चीजें विरासत में दोनों देशों के पास बराबर मात्रा में पहुंची, एक का रास्ता, दूसरे से बिलकुल अलग जा मिला.

हर पड़ोसी भारत और भूटान की तरह क्यों नहीं होते?

कलह, खून, बम धमाके, शहादत, संघर्ष विराम का उल्लंघन और बमबारी. 70 सालों में भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों की यही उपलब्धि है.

कैसे संभलेगी कश्मीर की नैया राज्यपाल भरोसे

वोहरा को संभालने के लिए बिगड़ैल हाथी मिला है जो तांडव करने को आतुर है. वोहरा कैसे महावत साबित होंगे यह आने वाले दिनों में ही पता चल सकता है.

…तो महबूबा सरकार गिराने के पीछे बीजेपी की झल्लाहट है?

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन वापस लेते हुए सरकार गिरा दी है, जिसके चलते राज्य में राज्यपाल शासन लगभग तय है। कांग्रेस और […]

देश का ऐसा कोना जहां न जवान सुरक्षित हैं न पत्रकार

शनिवार को भारत में ईद है. कश्मीर में भी क्योंकि कश्मीर देश से बाहर नहीं है. आतंकी भी इस पाक महीने में रोजा रखते हैं […]