सुशांत, हाथरस केस: जांच में देरी से मीडिया को मिलते हैं मौके

पिछले कुछ महीनों में मीडिया रूपी गिद्ध को दो मामले मिले. इन दो मामलों ने मीडिया को टीआरपी रूपी संजीवनी दी. सिर्फ किम जोंग और […]

सुशांत केस में अतिवादी रिपोर्टिंग लोगों को बेवकूफ बना रही है?

मीडिया के विद्यार्थियों को बुलेट थियरी पढ़ाई जाती है। इसमें होता कुछ यूं है कि एक ही चीज आपको इतनी बार दिखा दी जाए कि […]

चुनाव के इस दौर में आचार संहिता का इंटरव्यू पढ़ लीजिए

एक वक्त था, जब चुनाव में उनका खौफ हुआ करता था। नेता लोग कुछ भी बोलने से पहले सोचते थे कि कहीं वह नाराज न […]

तलाक से UV/PV बटोरते संपादक पत्रकारिता की कब्र खोद रहे हैं

तीन नवंबर 2018 को अचानक से खबर मोबाइल की स्क्रीन पर फ्लैश हुई कि शादी के 6 महीने के भीतर ही तेजप्रताप ने अपनी पत्नी […]

प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है

प्रजातंत्र के रक्षकों के लिए संविधान सिर्फ एक ढाल बनकर रह गया है जो समय-समय पर इन्हें सत्य पर असत्य की जीत दिलाता है। ये लोग भाषा की संयमता पर भी सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हुए एक-दूसरे पर आक्षेप लगाते है।