छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक धर्म संसद हुई थी. इसी धर्म संसद में कुछ बयानबाजियां हुईं. कुछ आपत्तिजनक बयानबाजियों की वजह से, कालीचरण महाराज […]
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जब ‘वंदे मातरम’ पर सुभाष चंद्र बोस ने नेहरू को लिखी चिट्ठी
‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद आज भी विवाद होते रहते हैं। हालांकि, ये विवाद नए नहीं हैं। ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर शुरुआत में भी […]
गांधी की नजरों में सबसे बड़े भिक्षुक क्यों थे मदन मोहन मालवीय?
विश्वविद्याल की नींव डालने की तैयारी चल रही थी। तत्कालीन भारत में महामना कहे जाने वाले शिक्षाविद, वकील, नेता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. मदन मोहन […]
नेहरू कुछ अच्छा कर गए हैं तभी उनकी आलोचना हो रही है
राहुल सांकृत्यायन. ऐसे समय में जब किसी व्यक्ति पर सबसे ज्यादा हमला हो तो यह अपने आप समझा जाना चाहिए कि वह कितना योग्य रहा […]
एनकाउंटर वाले ज़माने में ‘गांधी’ ने देश से मुंह फेर लिया है
जिस देश में मौत का उत्सव मनाया जाता हो, जहां एनकाउंटर को गर्व के साथ उपलब्धि के रूप में विधानसभा में गिनाया जा रहा हो […]
क्या गांधी के देश में विरोध का स्वरूप गांधी के विरोध की तरह है?
लोकतंत्र में विरोध होना जायज है। जब-तक जनता अपनी स्वस्थ मांगों को लेकर सरकार के सामने विरोध नहीं करेगी तब तक वह लोकतंत्र लगभग अधूरा रहेगा।और जब यह विरोध ख़त्म हो जाएगा तो वह लोकतंत्र तानाशाही में परिवर्तित होने लगेगी,लेकिन प्रश्न यह है कि विरोध का स्वरुप कैसा हो??
जन्मदिन विशेष: भारत के पहले राष्ट्रपति जिन्हें नेहरु ने कभी राष्ट्रपति नहीं समझा
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का वह दौर जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफत का दूसरा नाम महात्मा गांधी था, उस दौर में अपने-अपने क्षेत्र के बहुत से […]
कश्मीर को जोड़ने वाली डोर अब सड़ रही है!
कश्मीर में उग्रवाद, उन्माद, कट्टरवाद, पहले से नहीं रहा है। कश्मीर में कई सूफी संस्कृतियां पैदा हुईं हैं। कश्मीर सूफी, संतो का स्थल था। वहां […]
गांधी को पूजना आसान है, उनके रास्ते पर चलना बेहद मुश्किल
भारत का एक वर्ग बिना परिस्थितियों की जटिलता और सच्चाई को समझे महात्मा गांधी को ही भारत-पाकिस्तान विभाजन का कारण मानता है और मानता रहेगा। […]