Tag: mahatma gandhi
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महात्मा गांधी को दी थी गाली, कालीचरण को पुलिस ने किया गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक धर्म संसद हुई थी. इसी धर्म संसद में कुछ बयानबाजियां हुईं. कुछ आपत्तिजनक बयानबाजियों की वजह से, कालीचरण महाराज को गिरफ्तार कर लिया गया है. कालीचरण को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से गिरफ्तार किया गया है. छत्तीसगढ़ पुलिस कई दिनों से कालीचरण की तलाश कर रही थी. अब…
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जब ‘वंदे मातरम’ पर सुभाष चंद्र बोस ने नेहरू को लिखी चिट्ठी
‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद आज भी विवाद होते रहते हैं। हालांकि, ये विवाद नए नहीं हैं। ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर शुरुआत में भी कई आपत्तियां की गईं। सबसे बड़ी आपत्ति थि की यह गीत एक धर्म विशेष के हिसाब से भारतीय राष्ट्रवाद को परिभाषित करता है। ये आपत्तियां मुसलमानों के अलावा कई सिख,…
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गांधी की नजरों में सबसे बड़े भिक्षुक क्यों थे मदन मोहन मालवीय?
विश्वविद्याल की नींव डालने की तैयारी चल रही थी। तत्कालीन भारत में महामना कहे जाने वाले शिक्षाविद, वकील, नेता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालय स्थापना के लिए चंदे की व्यवस्था कर रहे थे। ऐसे में उन्होंने हर उचित उपाय से धन एकत्रीकरण का अभियान थाम रखा था। इसी क्रम में मालवीय जी…
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नेहरू कुछ अच्छा कर गए हैं तभी उनकी आलोचना हो रही है
राहुल सांकृत्यायन. ऐसे समय में जब किसी व्यक्ति पर सबसे ज्यादा हमला हो तो यह अपने आप समझा जाना चाहिए कि वह कितना योग्य रहा होगा. ऐसा ही कुछ पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ हो रहा है. तमाम उम्दा यादों के बीच घिरा यह शख्स आज जब याद किया जाता है तो सबसे ज्यादा…
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एनकाउंटर वाले ज़माने में ‘गांधी’ ने देश से मुंह फेर लिया है
जिस देश में मौत का उत्सव मनाया जाता हो, जहां एनकाउंटर को गर्व के साथ उपलब्धि के रूप में विधानसभा में गिनाया जा रहा हो वहां गांधी, किताबों में पड़े-पड़े बास मारते हैं. उनकी तस्वीरें सच में तोड़ देनी चाहिए, नोटों से उनकी तस्वीरें हटा देनी चाहिए. गांधी से बेहतर यहां गोडसे को पूजना ठीक…
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क्या गांधी के देश में विरोध का स्वरूप गांधी के विरोध की तरह है?
लोकतंत्र में विरोध होना जायज है। जब-तक जनता अपनी स्वस्थ मांगों को लेकर सरकार के सामने विरोध नहीं करेगी तब तक वह लोकतंत्र लगभग अधूरा रहेगा।और जब यह विरोध ख़त्म हो जाएगा तो वह लोकतंत्र तानाशाही में परिवर्तित होने लगेगी,लेकिन प्रश्न यह है कि विरोध का स्वरुप कैसा हो??
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जन्मदिन विशेष: भारत के पहले राष्ट्रपति जिन्हें नेहरु ने कभी राष्ट्रपति नहीं समझा
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का वह दौर जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफत का दूसरा नाम महात्मा गांधी था, उस दौर में अपने-अपने क्षेत्र के बहुत से प्रतिष्ठित लोगों ने महात्मा गांधी के नाम पर अपने नौकरी पेशे को त्यागकर आन्दोलन की मुख्य धारा में खुद को झोंक दिया था. डॉ राजेंद्र प्रसाद उसी में से एक…
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कश्मीर को जोड़ने वाली डोर अब सड़ रही है!
कश्मीर में उग्रवाद, उन्माद, कट्टरवाद, पहले से नहीं रहा है। कश्मीर में कई सूफी संस्कृतियां पैदा हुईं हैं। कश्मीर सूफी, संतो का स्थल था। वहां विभिन्न धर्मों के प्रचारक, विचारक शांति के लिए जाते थे। राजतरंगिणी में कल्हड़ ने एक बार कहा था कि कश्मीर के लोग पुष्प की तरह कोमल होते है। 1953 में…
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गांधी को पूजना आसान है, उनके रास्ते पर चलना बेहद मुश्किल
भारत का एक वर्ग बिना परिस्थितियों की जटिलता और सच्चाई को समझे महात्मा गांधी को ही भारत-पाकिस्तान विभाजन का कारण मानता है और मानता रहेगा। इसी सोच का नतीजा है कि गांधी जी की हत्या कर दी गई थी। जबकि गांधी तो हमेशा नेहरू और सरदार पटेल को समझाते रहे कि विभाजन की बात मत…