Tag: rahul gandhi
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बेघर होने की राह पर 10 लाख आदिवासी! दोष किसका?
सुप्रीम कोर्ट ने 10 लाख से अधिक आदिवासियों को जमीन से बेदखल करने का आदेश दिया है। आदिवासी समुदाय पर आए इस फैसले से मुझे कोई हैरानी नहीं है क्योंकि यह तय था और इस बात का सबसे बड़ा सबूत कुछ और नहीं सरकार का 2006 में बनाया कानून ही है। यह बात कोई हवा…
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क्षत्रपों के बलबूते प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे राहुल गांधी
तीन राज्यों में ऐंटी इन्कंबेंसी लहर पर सवार कांग्रेस ने किसी न किसी तरह सरकार बना ही डाली। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए ऐंटी इन्कंबेंसी की लहर उतनी नहीं दिख रही है, जितनी की किसी विधानसभा चुनाव के लिए होती है। फिर भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए…
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मध्य प्रदेश कांग्रेस का मैनिफेस्टो जेब में रखिए, हिसाब लेना है
मध्य प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी है। वोट लेने के लिए हर पार्टी की तरह कांग्रेस ने भी जमकर लोक-लुभावन वादे किए हैं। इन वादों की एक पत्रिका भी जारी की गई, जिसका नाम ‘वचन पत्र’ रखा गया। कांग्रेस की केंद्रीय यूनिट से लेकर राज्य स्तरीय नेताओं ने भी वादा किया…
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विधानसभा चुनाव खत्म: बेशर्म बयानबाजी से वोटर्स को क्या मिला?
पांच राज्यों राजस्थान, तेलंगाना, मिजोरम, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है। जनता के साथ-साथ नेता भी नर्वसनेस में 11 दिसंबर का इंतजार करने में लग गए हैं। खैर, ये चुनाव भी किसी अन्य चुनाव से अलग नहीं रहे। हां, समय के साथ इतना जरूर हुआ है कि लगातार…
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एमपी चुनाव: धूल झाड़कर उठ खड़ी हो पाएगी कांग्रेस?
Madhya Pradesh Elections: पूरे चुनावी रण में मतदाताओं की खामोशी ने राजनेताओं के दिलो दिमाग में तड़प पैदा कर दी थी. बीजेपी और कांग्रेस के बड़े नेताओं तक को यह नहीं पता चल पाया कि वो जिस भाग्य विधाता से रोज मिलने जा रहे हैं वो मतदान किसको करेगा.
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‘देश बचाने’ के नाम पर इकट्ठा होता मुद्दा विहीन विपक्ष क्या करेगा?
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कई बार कई नेताओं ने अपने हक में बयार चलाने की कोशिश की है। पहले मायावती, फिर ममता बनर्जी और अब चंद्रबाबू नायडू। ममता और मायावती ने विपक्ष के तमाम नेताओं से मुलाकात करके विपक्ष को गोलबंद करने की कोशिश की लेकिन असफल रहीं। अब चंद्रबाबू नायडू वही कोशिश…
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पॉलिटिकल लव: सैंया गए तेल लेने आओ हम-तुम इश्क लड़ाएं
तुम कोई भी फैसला सुना देती हो। सही फैसला ही सुनाती हूँ मैं। तुम न वही फैसले सुनाया करो जिनका पालन हो सके। अच्छा तो मैं तुम्हारी गुलाम बन जाऊं! नहीं-नहीं तुम स्वंत्रत हो एकदम। अच्छा लेकिन लग नहीं रहा है। मैं तुम से बात नहीं करूंगी। क्यों क्या हुआ मेरी जान? तुम हर बात…
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कहावत ‘उड़ता तीर‘ लेने की थी पार्टियों ने ‘उड़ता जेट’ ले लिया
डिजिटल होती दुनिया और टेक्नोलॉजी के इस दौर में सब कुछ बहुत तेज़ी से बदल रहा है. स्मार्टफोन के मॉडल से लेकर एंड्राइड OS इतनी तेजी से अपडेट हो रहे हैं. इतनी तेज़ी से तो घर के बच्चे भी बड़े नहीं होते. दस में से साढ़े नौ जेब में टुनटुनाने वाले शियोमी के स्मार्टफोन की…
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ब्रेकिंग: विवाद के बाद आया राफेल का पहला बयान
मैं राफेल बोल रहा हूं। हां मैं बोल सकता हूँ। मैं बोफोर्स दादा की तरह नहीं कि मैं सुनकर चुप हो जाऊं। मैं आपके देश के 2G या 3G की तरह भी नहीं हूं, जो बिना बोले सबको छोड़ दूं। मैं बोलूंगा और जोर से बोलूंगा, अगर आप सुन नहीं सकते तो अपने कान बंद…
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…तो मोदी और केसीआर का रिश्ता फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स वाला है?
के. चंद्रशेखर राव ने अपने राजनीतिक अनुभव और चालाकी के हिसाब से सबसे धांसू चाल चली है। फौरी तौर पर देखने से ऐसा लगता है कि केसीआर के नाम से चर्चित तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के मुखिया चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले-पहले विधानसभा जीत ली जाए। हालांकि, राजनीतिक दावपेंच समझने वाले मान रहे हैं…