मैं पेट्रोल बोल रहा हूं, तुम मेरा दर्द सुनोगे?

 मैं कोई और नहीं पेट्रोल बोल रहा हूं। आप मुझे रोज कोसते हैं, रोज गालियां देते हैं कि मैं महंगा हो गया। क्या आपने कभी मेरा दर्द समझा ? मैं कितने टैक्सों से लदा हूं। क्या पता आपको, आपको तो सिर्फ अपना दर्द दिखता है!
 मैं जब घर से निकलता हूं, तब मैं इतना सस्ता होता हूं कि गरीबी रेखा मुझसे ऊपर होती है लेकीन ये जालिम टैक्स वाली दुनिया मुझे आपसे दूर करती है. आपको यकिन नहीं होता तो देखिए मेरी हालात जब मैं ऑयल रिफाइनरी कंपनियों, सरकारी तेल से निकलता हूं तो 28.29 रुपये प्रति लीटर होता हूं। उसके बाद कंपनियां अपना मार्जिन मुझसे निकलती है और मैं 30.81 पैसे में एक लीटर पेट्रोल हो जाता हूं.
अब कुछ अंदाजा लगा मेरे हलातो का , कुछ समझ आया मेरा दर्द. क्या हुआ रोना आया ना आपको , अब तो गाली नहीं दोगे ना मुझे.आपका दिल इतने में ही पसीज गया लेकिन दर्द तो अभी और है.
कंपनियों के बाद मुझसे सरकार कमाती है लेकिन आपको मैं ही दोषी लगता हूं. केन्द्र मुझ पर 19.48 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी जोड़ाता है. ये ड्यूटी मुझे आपसे दो कदम और दूर कर देती है. इस ड्यूटी के बदले मुझे क्या मिलता है, सिर्फ आपकी गालियां.
आप गाली देकर थक गए होगे लेकिन मैं अभी भी बचा नहीं हूं, उसके बाद पेट्रोल पंप डीलर्स को मुझ पर 3.55 रुपये प्रति लीटर कमीशन लगाते है. फिर इसके उपर राज्य सरकार वैट लगा कर मेरी वाट लगा देती है लेकिन फिर भी सारा का सारा दोष मुझे ही मिलता है, लेकिन असली दोषी कौन है समझ आ गया होगा आपको , नहीं आया तो कोइ बात नहीं.
चलता हूं दुआओं में याद रखना “इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया सबको, लोगो से मिलना न सही, गाली सुनने का हुनर तो आ गया.”

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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