Category: बवंडर
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आरुषि हत्याकांड: किस वाली कोर्ट पर ज्यादा भरोसा करें?
9 साल पहले एक लड़की और एक नौकर को बेरहमी से मारा गया, पहुंचे-पहुंचाए लोगों का मामला था इसलिए खूब कवर हुआ और फिल्म भी बन गई लेकिन न्याय व्यवस्था आज भी अपराध के सामने हांफती दिख रही है। सीबीआई की दलीलों और सबूतों के दम पर निचली अदालत ने लड़की के माँ-बाप को दोषी…
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मैं इश्क़ में इंटर्न हूं
यार! तुम्हारा प्यारा न हुआ किसी मीडिया संस्थान की नौकरी हो गई है, जो किसी भी वक़्त बिना नोटिस फ़ायर हो सकती है. यार कमाल कमाल करते हो तुम भी. तुम कौन सा मुझे सरकारी नौकरी की तरह रिटायरमेंट तक पकड़ कर बैठे रहोगे, जहां कोई मुझसे बेहतर मिली पकड़ के निकल लोगे. नहीं यार अपनी कसम, तुम्हारे प्यार…
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‘कुमार’ गैंग से सावधान रहना बेहद जरूरी है!
सोशल मीडिया पर एक तबका नाम के हिसाब से दलितों का रहनुमा बनने की कोशिश करते नजर आता है। इसके लिए बाकायदा एक प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसमें पहला पड़ाव है अपने नाम के आगे ‘कुमार’ लिखना। इस जमात की दीक्षा के हिसाब से सबसे पहले वह इंसान इस समाज का सबसे बड़ा गुनहगार…
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दिल्ली वालों, पटाखा बिना दिवाली कैसे मनी?
ये तस्वीर दिल्ली के दिवाली के बाद की है। जैसे हर त्यौहार पूरे देश में अलग अलग तरीके से मनाया जाता है, वैसे ही दिवाली भी पूरे देश में अलग अलग तरीके से मनाई जाती है। उत्तर भारत खासकर यूपी बिहार के गांवों में खिलौने वाली मिठाई अनिवार्य होती है। घी के दिए अनिवार्य होते…
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मैं पेट्रोल बोल रहा हूं, तुम मेरा दर्द सुनोगे?
मैं कोई और नहीं पेट्रोल बोल रहा हूं। आप मुझे रोज कोसते हैं, रोज गालियां देते हैं कि मैं महंगा हो गया। क्या आपने कभी मेरा दर्द समझा ? मैं कितने टैक्सों से लदा हूं। क्या पता आपको, आपको तो सिर्फ अपना दर्द दिखता है! मैं जब घर से निकलता हूं, तब मैं इतना सस्ता…
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जुड़वा-2 ने दिया बॉलीवुड बॉक्स ऑफिस को ऑक्सीजन
ये साल बॉलीवुड बॉक्स ऑफिस के लिए कुछ खास नही रहा, पिछले कुछ दिनों से छोटे बजट की फिल्में अच्छा कंटेंट होने की वजह से अच्छा व्यवसाय कर रही हैं। लेकिन जुड़वा-2 की अप्रत्याशित सफलता ने कुछ हद तक बॉक्स ऑफिस के लिये ऑक्सीजन का काम किया है। पिछले शुक्रवार को रिलीज हुई वरुण धवन…
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रामायण की कहानी कलियुग की ज़ुबानी
आज अगर रावण होता तो सबसे बड़ा टैक्स पेयर होता। भाई उसके पास सोने की लंका थी, वो सबकी लंका लगा देता। रावण को उसका घमण्ड नहीं जीएसटी बर्बाद कर देता और बाकी बची कसर नोटबन्दी निकाल देती। रावण को जब तक समझ आता तब तक मोदी जी विदेश निकल लेते। कुम्भकर्ण को आप सब…
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वर्ल्ड हार्ट डे! ये दिल न होता बेचारा
विश्व हृदय दिवस है हृदय यानी दिल, जो न लेफ्ट होता है और न राइट। सेन्टर में होने की भी कोई संभावना नहीं है। अब जब पता ही नहीं कि होता कहां है तो इसको खोजने का भी कोई फायदा नहीं। जब दीवानगी दिल पर चढ़ती है तब दिल का पता लगता है, असल में…
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दंगाइयो की नज़रों से कब तक बचे रहेंगे गांव?
कॉलेज के आख़िरी दिनों में हमारे रहने का ठिकाना बना मेरठ के गंगानगर का एम ब्लॉक। जिस मकान में हम रहते थे उसी के बग़ल में एक आंटी जी रहती थीं। आंटी जी लीडर थीं। कोई न कोई महिला फ़रियादी उनके घर के बाहर अरदास लगाने पहुंची रहती। सप्ताह के किसी एक दिन आंटी जी…
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जनवादी पत्रकारिता को तिलांजलि दे चुकी है मेन स्ट्रीम मीडिया
गुज़रा महीना समाचार और ख़बरों के बाज़ार के लिए बड़ा सीजन रहा क्योंकि साल का सबसे बड़ा ख़ुराक मीडिया को गुरमीत रामरहीम के नाम पर मिला. बहुत सारे पत्रकारों को ग्राउंड रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला और रिटायर होने के बाद अपने बच्चे और पत्रकार बनना चाह रहे बच्चों को सुनाने योग्य कहानी भी मिल…