Category: बवंडर

  • जस्टिस लोया पर क्या कहती है कोर्ट की चुप्पी?
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    जस्टिस लोया पर क्या कहती है कोर्ट की चुप्पी?

    लोकतंत्र के तीन स्तंभ हैं, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। संविधान ने इन्हें इस तरह से गढ़ा है कि वे एक दूसरे की आलोचना कर सकते हैं और आलोचना करते हुए भी एक दूसरे के पूरक हैं। सभी के सवालों का महत्व है लेकिन जब सवाल न्यायपालिका उठाती है तो उसका महत्व कुछ ज्यादा ही बढ़…

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    पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में कुछ विवाद करते हैं

    तुम भी भारतीय रेल हो गए हो अरे क्या हुआ ऐसे क्यों बोल रही हो? जब देखो जब तुम्हारी हालत खस्ता ही नजर आती है. हाहाहा, कहो तो वास्कोडिगामा बन जाऊं रहने दो आज वो भी पटरी से उतर गए. अच्छा तुम मुझसे कितना प्यार करते हो? उतना ही जितना पाकिस्तान हाफिज सईद से, यानी…

  • प्रदूषण का ‘होम्योपैथी’ इलाज जरूरी है
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    प्रदूषण का ‘होम्योपैथी’ इलाज जरूरी है

    अक्टूबर बीत गया अब नवंबर की शुरुआत हो चुकी है, नवंबर की शुरुआत के साथ ही दिल्ली, एनसीआर और हरियाणा-यूपी के निकटवर्ती जिलों में काली धुंध का आगमन शुरू हो गया है। आकाश में ये घने काले धुंध का आना कोई नयी बात नहीं हैं क्योंकि ये तो हर साल आते हैं हाँ लेकिन ये…

  • विद्या बालन का फिल्म प्रमोशनल नारीवाद
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    विद्या बालन का फिल्म प्रमोशनल नारीवाद

    विद्या बालन का हालिया बयान उस समय तक एकदम सच लग रहा था, जब तक यह नहीं पता था कि उनकी फिल्म भी आने वाली है। पता चली कि विद्या की फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ रिलीज होने वाली है। विद्या फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में या यूं कहें ट्रेंड फॉलो करते हुए तथाकथित रूप से…

  • बाजार के फेफड़े तो धुंए से ही हरे होते हैं
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    बाजार के फेफड़े तो धुंए से ही हरे होते हैं

    “हवा के दोश पे उड़ती हुई ख़बर तो सुनो हवा की बात बहुत दूर जाने वाली है” —हसन अख्तर जलील आज बाजार किसी भी हालात को नहीं छोड़ता, वो चाहे बारिश हो या बाढ़, आग हो या पानी बाजार अपनी जगह बना ही लेता है। दिल्ली आज दिलवालों की नहीं धुआं वालो की हो गई…

  • विकास की आग लोगों के शरीर तक पहुंच रही है
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    विकास की आग लोगों के शरीर तक पहुंच रही है

    कभी जीवन में किसी अनजान क्षितिज तक पहुँच कर आप भी ऐसे दौर पर पहुँचे होंगे कि कोई हाथ बढ़ाए और आपको दुविधा से बाहर निकाले। हर दौर में जहाँ सहायता करने वालों की कमी नहीं है, वहीं कुछ लोग तमाशबीन बनकर मंजर को देखते हैं। अब लोग तमाशा फेसबुक पर अपलोड करने के लिये…

  • कश्मीर को जोड़ने वाली डोर अब सड़ रही है!
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    कश्मीर को जोड़ने वाली डोर अब सड़ रही है!

    कश्मीर में उग्रवाद, उन्माद, कट्टरवाद, पहले से नहीं रहा है। कश्मीर में कई सूफी संस्कृतियां पैदा हुईं हैं। कश्मीर सूफी, संतो का स्थल था। वहां विभिन्न धर्मों के प्रचारक, विचारक शांति के लिए जाते थे। राजतरंगिणी में कल्हड़ ने एक बार कहा था कि कश्मीर के लोग पुष्प की तरह कोमल होते है। 1953 में…

  • आजादी के 70 साल बाद भी यह भूख है बड़ी!
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    आजादी के 70 साल बाद भी यह भूख है बड़ी!

    2017 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स का आंकड़ा इंटरनेशनल फ़ूड पालिसी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पेश कर दिया है। पिछले साल की तुलना में भारत की स्थिति और भी भयंकर हो गई है। साल 2016 की रिपोर्ट में भारत को 97वां स्थान स्थान मिला था। तब भारत में इसको लेकर खूब हो हल्ला हो रहा था…

  • क्या संस्कार की बजाय बलात्कार में बदल रहा है विवाह?
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    क्या संस्कार की बजाय बलात्कार में बदल रहा है विवाह?

    हमारे भारतीय समाज  में विवाह को बहुत ही पवित्र माना जाता है, कहा जाता है विवाह दो आत्माओं, दो परिवारो का मिलन होता है लेकिन जब ये संस्कार बलात्कार में परिवर्तित होता है तब क्या होता है? आइए इसके कुछ बिन्दुओ पर चर्चा करें। सबसे पहले तो ये कि लोग शादी क्यों करते है? आप…

  • क्या सिर्फ दिवाली के दिन की जागरूकता हमारे पर्यावरण को बचा सकती है?
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    क्या सिर्फ दिवाली के दिन की जागरूकता हमारे पर्यावरण को बचा सकती है?

    दिवाली आने में बस कुछ ही दिन बच गए हैं, दिवाली प्रेम और प्रकाश का त्योहार है। दिवाली आते ही लोगों के चेहरे की रौनक बढ़ जाती है, आस-पास का माहौल खुशनुमा हो जाता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह का माहौल रहता है लेकिन हर बार दिवाली हमें कुछ अच्छी यादों के…