लोकतंत्र के तीन स्तंभ हैं, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। संविधान ने इन्हें इस तरह से गढ़ा है कि वे एक दूसरे की आलोचना कर सकते […]
Category: बवंडर
पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में कुछ विवाद करते हैं
तुम भी भारतीय रेल हो गए हो अरे क्या हुआ ऐसे क्यों बोल रही हो? जब देखो जब तुम्हारी हालत खस्ता ही नजर आती है. […]
प्रदूषण का ‘होम्योपैथी’ इलाज जरूरी है
अक्टूबर बीत गया अब नवंबर की शुरुआत हो चुकी है, नवंबर की शुरुआत के साथ ही दिल्ली, एनसीआर और हरियाणा-यूपी के निकटवर्ती जिलों में काली […]
विद्या बालन का फिल्म प्रमोशनल नारीवाद
विद्या बालन का हालिया बयान उस समय तक एकदम सच लग रहा था, जब तक यह नहीं पता था कि उनकी फिल्म भी आने वाली […]
बाजार के फेफड़े तो धुंए से ही हरे होते हैं
“हवा के दोश पे उड़ती हुई ख़बर तो सुनो हवा की बात बहुत दूर जाने वाली है” —हसन अख्तर जलील आज बाजार किसी भी हालात […]
विकास की आग लोगों के शरीर तक पहुंच रही है
कभी जीवन में किसी अनजान क्षितिज तक पहुँच कर आप भी ऐसे दौर पर पहुँचे होंगे कि कोई हाथ बढ़ाए और आपको दुविधा से बाहर […]
कश्मीर को जोड़ने वाली डोर अब सड़ रही है!
कश्मीर में उग्रवाद, उन्माद, कट्टरवाद, पहले से नहीं रहा है। कश्मीर में कई सूफी संस्कृतियां पैदा हुईं हैं। कश्मीर सूफी, संतो का स्थल था। वहां […]
आजादी के 70 साल बाद भी यह भूख है बड़ी!
2017 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स का आंकड़ा इंटरनेशनल फ़ूड पालिसी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पेश कर दिया है। पिछले साल की तुलना में भारत की […]
क्या संस्कार की बजाय बलात्कार में बदल रहा है विवाह?
हमारे भारतीय समाज में विवाह को बहुत ही पवित्र माना जाता है, कहा जाता है विवाह दो आत्माओं, दो परिवारो का मिलन होता है लेकिन […]
क्या सिर्फ दिवाली के दिन की जागरूकता हमारे पर्यावरण को बचा सकती है?
दिवाली आने में बस कुछ ही दिन बच गए हैं, दिवाली प्रेम और प्रकाश का त्योहार है। दिवाली आते ही लोगों के चेहरे की रौनक […]