हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाजे बयां और जिन लोगों ने जॉन एलिया को मंचों पर […]
Category: साहित्य
पुण्यतिथिः शशि सूर्य हैं फिर भी कहीं, उनमें नहीं आलोक है – मैथिलीशरण गुप्त
यह रिवर्स टैलेंट का दौर है,जब संघर्षों की आवश्यक प्रक्रियाएं रोचक कहानियों के आवरण में सहानुभूतिक शब्दों के टैगलाइन के साथ बेची जा रही हैं, […]
शबा का पिंक स्वेटर
अनुज को सब याद है….. पिंक स्वेटर का डिज़ाइन जो माँ ने खान आंटी से सीखा था, उस स्वेटर का ऊन जो चौक से खरीदकर […]
मिथक और इतिहास की आंख से वर्तमान को देखते थे कुंवर नारायण
कुंवर उस दौर में कलम उठाते हैं जब वैश्विक इतिहास द्वितीय विश्वयुद्ध, भारतीय स्वाधीनता संग्राम और गांधी युग जैसे उल्लेखनीय घटनाक्रमों से साक्षात्कार कर रहा था।
कविता- तुम जानती हो चुराए हुए चुम्बनों का स्वाद?
तुम्हारे कुछ चुंबन बचे हैं मेरे होठों पर कुछ मेरे भी बचे हों शायद तुम्हारे पास ये हमारे पहले चुंबन नहीं थे ये चुराये हुये […]
घास इन कोठेवालियों की दूर की रिश्तेदार है
जैसे बिन बोए उग आती है घास जमीन के हर हिस्से पर ठीक वैसे ही कुछ लड़कियां उगती हैं शहर की हर गली – हर […]
ये मेरे हिन्दुस्तान को कौन सा रोग लग रहा है भाई!
तुम हिन्दू हो ,मै मुस्लिम हूं। तुम्हारा रास्ता मंदिर तो मै मस्जिद को जाता हूं। तुम टीका लगाते हो तो मै टोपी पहनता हूं, तुम […]
ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है: साहिर लुधियानवी
विभाजन के बाद साहिर ने हिंदुस्तान छोड़ दिया और पाकिस्तान चले गए। उस दौर के मशहूर फिल्म निर्देशक थे ख्वाजा अहमद अब्बास। अब्बास साहिर के […]
कहानी: तीन दोस्त, सियासी गिद्ध और मौत
मोहित,सोनू और इरफान की दोस्ती के चर्चे पूरे कस्बे में मशहूर थे। आखिर कौन भूल सकता था, जब कल्लू ने इरफान की बहन को छेड़ने […]
ये इश्क़ तो नहीं है
इश्क़ का कॉन्ट्रैक्ट करोगे? सुनो! कहो! प्यार हुआ है कभी तुम्हें? हां! कई बार। और जिनसे तुमने प्यार किया, क्या उन्हें भी तुमसे प्यार था? […]