जन्मदिनः ‘मैं जो हूं जॉन एलिया हूं जनाब, इसका बेहद लिहाज कीजिएगा’ – जॉन एलिया

हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाजे बयां और जिन लोगों ने जॉन एलिया को मंचों पर […]

पुण्यतिथिः शशि सूर्य हैं फिर भी कहीं, उनमें नहीं आलोक है – मैथिलीशरण गुप्त

यह रिवर्स टैलेंट का दौर है,जब संघर्षों की आवश्यक प्रक्रियाएं रोचक कहानियों के आवरण में सहानुभूतिक शब्दों के टैगलाइन के साथ बेची जा रही हैं, […]

मिथक और इतिहास की आंख से वर्तमान को देखते थे कुंवर नारायण

कुंवर उस दौर में कलम उठाते हैं जब वैश्विक इतिहास द्वितीय विश्वयुद्ध, भारतीय स्वाधीनता संग्राम और गांधी युग जैसे उल्लेखनीय घटनाक्रमों से साक्षात्कार कर रहा था।

कविता- तुम जानती हो चुराए हुए चुम्बनों का स्वाद?

तुम्हारे कुछ चुंबन बचे हैं मेरे होठों पर कुछ मेरे भी बचे हों शायद तुम्हारे पास ये हमारे पहले चुंबन नहीं थे ये चुराये हुये […]

ये मेरे हिन्दुस्तान को कौन सा रोग लग रहा है भाई!

तुम हिन्दू हो ,मै मुस्लिम हूं। तुम्हारा रास्ता मंदिर तो मै मस्जिद को जाता हूं। तुम टीका लगाते हो तो मै टोपी पहनता हूं, तुम […]

ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है: साहिर लुधियानवी

विभाजन के बाद साहिर ने हिंदुस्तान छोड़ दिया और पाकिस्तान चले गए। उस दौर के मशहूर फिल्म निर्देशक थे ख्वाजा अहमद अब्बास। अब्बास साहिर के […]