Category: साहित्य

  • महात्मा गांधी का जीवन-दर्शन है हिंद स्वराज
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    महात्मा गांधी का जीवन-दर्शन है हिंद स्वराज

    हिन्द स्वराज को गाँधी के विचारों का ब्लू प्रिंट माना जाता है |अगर आप गाँधी के विचारों और सिद्धांतों से परिचित होना चाहते है तो हिन्द स्वराज सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है| यह संवाद शैली में लिखी गयी एक ऐतिहासिक कृति है जिसमें एक समाचार पत्र के संपादक और पाठकों के बीच संवाद को दिखाया गया…

  • विरोध करने की आजादी

    विरोध करने की आजादी

    सच कहने की आजादी से महरूम हैं हम विरोध करने की आजादी में मशरूफ हैं हम इंसान की कौम का कुछ भी पता नहीं धर्मों के बटंवारे की राजनीति में मशरूफ हैं हम रावण को राम ने मारा नारी की मर्यादा की खातिर नारी का शील हनन करने में लेकिन मशरूफ है हम नन्हें कर्णधार…

  • एक रात की जेल

    एक रात की जेल

    ग्वालियर से चलकर बनारस की ओर जाने वाली बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस गाड़ी स्ंख्या 11107, अपना पिछला स्टेशन छोड़ चुकी है और कुछ ही क्षणों में अपने अगले पड़ाव महोबा स्टेशन पहुंचने वाली है। महोबा पहुंचने वाली ये गाड़ी अपने पीछे जो स्टेशन छोड़ कर आयी थी वो स्टेशन था हरपालपुर। रक्षाबन्धन की छुट्टियों के बाद हमें…

  • आज भी भटक रहा है गुनाहों का देवता

    आज भी भटक रहा है गुनाहों का देवता

    गुनाहों का देवता जितनी बार पढ़ता हूं हर बार कुछ नया पाता हूं। चन्दर इस बार पहले से ज्यादा भ्रमित लगा,  सुधा पहले से और ज्यादा मजबूत। चन्दर मानवीय स्वभाव का एक बेहद शानदार उदाहरण है, जो थोड़ी सी परेशानियों में अपना खुदा ही बदल लेता है। सुधा अपने स्वभाव में चाहे जितनी कोमल और…

  • मैं पूजा नहीं कर रही थी, एक बच्चे को प्यार कर रही थी- इस्मत चुग़ताई

    मैं पूजा नहीं कर रही थी, एक बच्चे को प्यार कर रही थी- इस्मत चुग़ताई

    ज़ंजीर कोई भी हो, अगर टूटेगी तो आवाज़ होगी. साहित्य और अदब में भी जब कभी कोई ज़ंजीर टूटती है, आवाज़ होती है. आवाज़ धीरे-धीरे शोर बन जाती है. शोर लोगों का ध्यान अपनी तरफ़ खींचता है. ऐसा ही एक शोर उठा था पचास के दशक में, जब इस्मत चुग़ताई ने ‘लिहाफ़’ लिखी थी. ‘लिहाफ़’,…

  • निर्मला (हर युग की फेमिनिस्ट नावेल )

    निर्मला (हर युग की फेमिनिस्ट नावेल )

    चेतन भगत की ‘वन इंडियन गर्ल’ पढ़ने वाले सो कॉल्ड ‘फेमिनिस्ट’ पाठक और फेमिनिज्म के नाम पर वैक्स करवाकर औरतों का दुःख समझने वाले लेखकों को फूहड़ और सस्ती साबित करती है प्रेमचन्द जैसे लेखकों की निर्मला जैसी नितांत करुण उपन्यास| प्रेमचंद की ‘निर्मला’ का महिला केन्द्रित साहित्य के इतिहास में अपनी एक अलग जगह…

  • कविता का सबसे संक्षिप्त रूप-विन्यास है हाइकू

    कविता का सबसे संक्षिप्त रूप-विन्यास है हाइकू

    कविताओं के लिए ‘गागर में सागर’ की कहावत तो बहुत पुरानी है। बात चाहे कबीर के दो लाइन और चार चरण वाले दोहों की हो या फिर गालिब के दो मिसरों वाले किसी शेर की। ये वो चमत्कार है जो शब्दों की सबसे न्यून मात्रा में जीवन के सबसे गूढ़ रहस्यों का पूरा ग्रंथ अपने आप में…

  • भारतेंदु हरिश्चंद्रः आधुनिक हिंदी के पितामह

    भारतेंदु हरिश्चंद्रः आधुनिक हिंदी के पितामह

    परिवर्तन गुजरते समय के अगले पदचिह्न के पर्याय भी होते हैं और एक लंबी यात्रा का एक पड़ाव भी। पड़ाव वह जहां से यात्रा नए कलेवर में, नई ऊर्जा के साथ एक नया स्वरूप लेकर आगे बढ़ती है। इस परिवर्तन को तब केवल परिवर्तन नहीं कहा जाता। तब इसे युगांतर, क्रांति या नए मार्ग का…

  • हाथ गर्दनें मरोड़ने के लिए भी होते हैं: पाश

    हाथ गर्दनें मरोड़ने के लिए भी होते हैं: पाश

    अवतार सिंह संधू ‘पाश’, जन्मजात विद्रोही। विद्रोह जिनका स्वभाव था, जो उनकी लेखनी में हर जगह दिखा। विद्रोही तेवर और बदलाव की छटपटाहट ने उन्हें क्म्युनिस्ट पार्टी का सदस्य बनाया। विद्रोह को आवाज देने के लिये कवितायें लिखीं जो विद्रोहियों का सामूहिक गान बना। कविताएं पाश के लिये महबूब की जुल्फों तले शाम करने के…

  • मेरे देश में दूल्हा बिकता है

    मेरे देश में दूल्हा बिकता है

    काका इलाक़े के बड़े ज़मींदारों में से एक है। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा इंजीनियर है, किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है। छोटा बेटा भी इंजीनियर है। लड़कियां भी नाम रोशन कर रही हैं। बड़ी लड़की प्राइमरी स्कूल में टीचर है, छोटी भी कहीं सरकारी नौकरी कर रही है।  …