फ़िल्म समीक्षा- एक स्वादिष्ट पकवान की तरह है सैफ की “शेफ़”

फ़िल्म समीक्षा- एक “शेफ”
निर्माता- भूषण कुमार
निर्देशक- राजा कृष्ण मेनन
मुख्य कलाकार- सैफ अली खान, पद्मप्रिया, स्वर कांबले, मिलिंद सोमण।
रेटिंग- 3.5/5

हर कोई अपने सपने को जीना चाहता है, कुछ लोग सपनों को पूरा करने में अपनों को खो देते हैं और कुछ लोग अपनों के लिये अपने सपनों को खो देते हैं, लेकिन अपनों के साथ अपने सपनों को कैसे जिये यही कहानी बयाँ करता है ये “शेफ”।
2014 में रिलीज़ हुई जोन फेवरयू निर्देशित अमेरिकी फ़िल्म “शेफ” का भारतीय संस्करण है ये फ़िल्म।
ये कहानी है रोहन कालरा(सैफ अली खान) की जो बचपन से खाना बनाने का बहुत शौकीन है लेकिन उसके पिता को ये मंजूर नहीं होता है जिस वजह से वो घर छोड़ कर भाग जाता है।
एक दिन वो अमेरिका के “गली रेस्त्रां” में मशहूर शेफ भी बन जाता है लेकिन अपने कस्टमर से मारपीट कर नौकरी से हाथ धो बैठता है।
जिसकी वजह से उसे वापस अपनी तलाक़शुदा पत्नी और बेटे के पास इंडिया आना पड़ता है।
इंडिया आकर उसे पता चलता है उसने अपने सपने को पाने के बाद कितनी गलतियां की कितना कुछ खो दिया, सब कुछ खोने के बाद वो सपना भी खो दिया।
यहाँ उसकी मुलाकात उसकी तलाक़शुदा पत्नी के बिज़नेसमैन दोस्त ( मिलिंद सोमण) से होती है, जिसे रोशन बहुत पसंद नहीं करता क्योंकि दोनों बहुत जल्द शादी करने वाले रहते हैं लेकिन उसकी मदद से वो फिर से अपने सपनों के एक खूबसूरत सफ़र पर निकलता है, इस सफ़र के उतार-चढ़ाव को देखने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना होगा।
फ़िल्म शेफ की कहानी बहुत ही खूबसूरती से दर्शायी गयी है।
देखते हुए इस फ़िल्म की हर बात दिल से गुज़रती है, कभी चेहरे पर मीठी मुस्कान आ जाती है तो कभी रिश्तों के ताने-बाने देखकर दिल भर जाता है।

जहाँ तक अभिनय की बात है तो काफी वक़्त बाद सैफ अली खान को ऐसे रोल में देख कर ख़ुशी होती है, जैसे लगता है ये रोल उनके लिए ही बना हुआ है। सैफ की तलाक़शुदा पत्नी के रोल में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पद्मप्रिया जानकी रमन ने बहुत प्रभावित किया है। बेटे के रोल में स्वर कांबले का अभिनय प्रशंसनीय है। बाकी सहकलाकारों में मिलिंद सोमण, चन्दन रॉय, दिनेश पी नाथ का अभिनय भी अच्छा है।

फ़िल्म की कहानी साधारण है लेकिन इसका फिल्मांकन शानदार है, इसकी स्क्रिप्ट कसी हुई है और संवाद प्यारे हैं जिससे कहीं फ़िल्म ढीली नहीं पड़ती।
फ़िल्म का संगीत ठीक-ठाक है, इक्का-दुक्का कमियों को छोड़ दे तो फ़िल्म बहुत अच्छी बनी है।
एयरलिफ्ट से शुरुआत करने वाले राजा कृष्णा मेनन ने एक मझे हुए निर्देशक की तरह इस फ़िल्म को बनाया है।

रूटीन मसाला फिल्मों से अलग एक खूबसूरत और ज़िन्दगी को जीने का एक नया नज़रिया देने वाली इस फ़िल्म को आप पुरे परिवार ले साथ ज़रूर देखें।
और खाली पेट ये फ़िल्म न देखे क्योंकि इस फ़िल्म में बन रहे स्वादिष्ट पकवान आपके पेट का इम्तिहान ले सकते हैं।

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