Hathras case

अपराधों पर पुलिसिया ढिलाई और आरोपियों के पक्ष में खड़े ट्रोल

शायद वह जमाना चला गया, जब दमन की किसी घटना पर जनता सड़क पर उतर आती थी। हाथरस में गैंगरेप/हत्या का मामला भी कुछ ऐसा ही है। इसका कारण यह है कि एक बड़ा वर्ग न जाने किस प्रतिबद्धता के तहत सरकारी दमन के पक्ष में होता है। सबको पता होता है कि गलत हो रहा है। लेकिन या तो चुप्पी साधी जाती है या फिर इंतजार किया जाता है कि हमारे गलत जैसा तुम्हारा गलत हो तो हम तुम्हें आईना दिखा दें। होता यूं है कि दोनों गलत एकसाथ नंग होकर शीशे के सामने खड़े हो जाते हैं। दोनों शीशे के सामने होते हैं लेकिन शर्म नहीं आती है क्योंकि दोनों की नंगे होते हैं।

लोकल डिब्बा को फेसबुक पर लाइक करें।

भक्त कौन होते हैं?

किसी भी पार्टी के समर्थक हों, उन्हें भक्त क्यों कहा जाता है? इसका जवाब कुछ यूं समझिए। समर्थक वह होता है, जो नीतिगत फैसलों, पार्टी की विचारधारा और उसके स्टैंड को लेकर उसका समर्थन करता है। अकसर इस विचारधारा से डिगने वाली पार्टी को उसके सच्चे समर्थक छोड़ देते हैं। ऐसे समर्थक विपक्षी पार्टियों में नहीं कूद जाते क्योंकि वे आदर्शवादी होते हैं। फिर आते हैं भक्त। इनसे विचारधारा या नीति या स्टैंड से कोई मतलब नहीं होता है। ये व्यक्ति विशेष, दल विशेष या झंडा विशेष देखकर लगे होते हैं। अब उनकी समर्थित पार्टी या नेता कुछ भी कह दे, ये उसी को मानते हैं। अगर इनका नेता कहे ये आम नहीं इमली है और आम की गुठली इनके मुंह में हो, तब भी ये बाहर इमली के बीज ही थूकते हैं। ऐसे भक्त न सिर्फ अपनी पार्टी के लिए, बल्कि समाज के लिए भी खतरनाक हैं।

बेशर्मो, एक और रेप हुआ है, फिर हमदर्दी दिखाओ और भूल जाओ

भक्त बढ़ जाते हैं तो आता है आपातकाल

हमारा समाज सदियों से दोनों तरह के लोगों को देख रहा है। जब-जब भक्त ज्यादा हुए हैं, देश में ‘आपातकाल’ हुए हैं। कुछ घोषित, कुछ अघोषित। हाथरस जैसी घटनाओं के संदर्भ में समझिए। आमतौर पर पुलिस या प्रशासन बिना रसूख या धनबल के किसी की बात नहीं सुनती। मामला चाहे रेप का हो, हत्या का हो या कोई मामूली चोरी ही। हां, रसूख हो तो पुलिस एक दिन में ही किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है, गायब कर सकती है, गाड़ी पलट सकती है या फिर मंत्री जी की भैंस भी ढूंढ सकती है। रसूख न होने पर पुलिस और प्रशासन मामले को दबा देते हैं। रेप जैसे जघन्य मामलों में समझौता करवा दिया जाता है। केस दर्ज ही नहीं किया जाता है और तथाकथित लोकलाज का भय दिखाकर मामला शांत कर दिया जाता है।

प्रशासन को सबसे आसान लीपापोती लगती है

हाथरस जैसे कुछ मामलों में जब पीड़ित की जान पर बन आती है या मामला स्थानीय मीडिया के चलते नोएडा फिल्म सिटी वाले मीडिया तक पहुंच जाता है, तब शुरू होती है लीपापोती। प्रशासन खुद को बचाने के लिए रात के अंधेरे का इस्तेमाल करता है। जल्द से जल्द सबूत मिटाने और नए सबूत गढ़ने की कोशिशें होती हैं। मामले को अलग और गलत दिशा में मोड़ने की कोशिश होती है और विरोध कर रहे लोगों को दो पक्ष में बांटने का काम किया जाता है। यहीं पर भक्तों का रोल शुरू होता है।

ट्रोलिंग पैटर्न को समझिए

अभी तक ‘रामराज्य में ऐसा नहीं हो सकता’ मोड में बैठे भक्त खुद को बचाने में लगे प्रशासन के पक्ष से बैटिंग करने लगते हैं। पहले चरण में विरोध कर रहे लोगों को मोटिवेटेड, दूसरी पार्टी के ट्रोल, दलाल और कई अन्य उपमाओं से नवाज दिया जाता है। फिर वीडियो या फोटो सबूतों को काटकर या अपने मतलब की बात के हिसाब से दिखाया जाने लगता है। और आखिर में शुरू होता है- तब क्यों नहीं बोले थे? दूसरी जगह सब ठीक है क्या? जहां हमारी सरकार नहीं वहां रेप नहीं होते क्या?

हर कुतर्क से डिफेंस करता है ट्रोल समाज

आपको हैरानी होगी कि ये सवाल किसी पार्टी के कार्यकर्ता नहीं भक्त पूछते हैं। वे पीड़ित के प्रति न्यूनतम संवेदना को भूलकर अपनी जाति, धर्म, पार्टी, नेता के हिसाब से जाने-अनजाने में आरोपियों/दोषियों की ओर हो जाते हैं। वे समझना ही नहीं चाहते कि वे गलत के साथ हैं। उन्हें लगता है कि वे इस प्रकार से अपने नेता या सरकार को बचा रहे हैं। जबकि सरकार किसी की स्थायी नहीं होती मित्र। इसी देश में सौ से भी कम सालों में न जाने कितने नेता हुए और चले गए। तुम्हारे वाले तो फिर भी 10-15 साल से हैं। इसलिए कम से कम न्यूनतम समझदारी, मानवीयता और व्यवहारिकता को भूलकर नेताओं और सरकारी नौकरों के फेर में न फंसें। अपने जमीर से पूछकर सही-गलत का फैसला करें। जमीर बिका हुआ हो तो उसका समाधान खुद निकालें।

इस लेखक के और लेख

hathras rape case

बेशर्मो, एक और रेप हुआ है, फिर हमदर्दी दिखाओ और भूल जाओ

hathras

हाथरस केस: इन सवालों के जवाब शायद कभी नहीं मिलेंगे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारा Youtube चैनल

पुराना चिट्ठा यहां मिलेगा

September 2026
SMTWTFS
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930