पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में पैराडाइज चलते हैं…

तो तैयार हो न तुम?

क्यों तुम कोई बड़ा बदलाव करने वाली हो क्या प्यार में?

सोच रही हूँ कुछ बदल ही लेते हैं अपने इस प्यार में..

अरे, रहने दो पिछले साल जो बदली थी वो आज तक भुगत रहे हैं…

हाहाहा, देखो कुछ तो करूँगी ही नवंबर आ गया है

देखो जो भी करना दिन में करना जिससे टाइम मिले सोचने का ..

 

आजकल बड़े चुप-चुप हो क्या बात है?

हाहाहा, बस मौन व्रत पर हूँ मैं,

क्यों तुम्हारा नाम भी किसी घोटाले में आ गया क्या?

 

अच्छा सुनो मेरे साथ कहीं चलोगी!

कहाँ चलना है बोलो बाबू?

सोच रहे हैं पैराडाइस (स्वर्ग) चलते हैं,

हाहाहाहा, क्यों प्यार में कुछ चुराना है क्या?

अरे रहने दो बाद में पता चला पेपर लीक हो गए तो घर वाले नरक कर देंगे,

 

एक बात बताऊँ?

हां बोलो जानू क्या बात है?

पता है जब तक तुम मेरे साथ नहीं थे, तब तक तुम मुझे बड़े बेकार लगते थे,

अब तो तुम्हारी पार्टी में हो गया अब तो ठीक लगता हूँ न,

हाहाहाहा, किसी और की पार्टी में ना चले जाओ उससे पहले तुम्हें सेक्योरिटी दे देती हूँ,

हाहाहाहा, लेकिन वाई कैटेगरी की देना।

 

पता है हम आजकल दिन में सब के सामने भी मिल सकते हैं,

अच्छा वो कैसे मेरी जान!

अरे दिल्ली में इतना स्मॉग है कोई नहीं देख पाएगा हमें,

हाहाहाहा, तभी तुम कल अपने पापा के सामने गाल पर किस करके भागी थी

हाहाहाहा, सही पकड़े हैं।

 

तुम मेरा बड़ा विरोध करते हो,

अच्छा, अब मुझे अरेस्ट तो नहीं करवा दोगी?

अरेस्ट तो करूँगी लेकिन प्यार की जेल में,

अरे फिर तो मैं विरोध भी नहीं कर पाऊंगा,

 

क्या सोच रहे हो?

कुछ नहीं सोच रहा था प्यार का कोई फेस्टिवल रखूं,

इसमें कोई रिकार्ड तो नहीं बनाने वाले हो,

उस फेस्टिवल में पॉलिटकल लव होगा,

यानी फेस्टिवल लोकल डिब्बा पर होने वाला है

अभय

अभय पॉलिटिकल साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। वर्तमान में पॉलिटिकल लव से उनकी पहचान बन रही है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों को ह्यूमर और इश्क के साथ पेश करना अभय की कला है।

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