Tag: हिंदी साहित्य
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बुर्क़े हटा के आ गयीं, घूंघट उठा के आ गयीं, ये औरतें कमाल..
डर से निजात पा चुकीं, जीने को मरने आ चुकीं, धरने पे मुल्क ला चुकीं, ज़िद इनकी है बहाल, सलाम..
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रामधारी सिंह दिनकर युद्ध की संभावना पर क्या कहते?
दिनकर व्यक्ति नहीं रहे। दिनकर एक चेतना हैं। एक राष्ट्र की चेतना। केवल भारत की नहीं, किसी भी स्वाभिमानी राष्ट्र की चेतना। वह वीर रस के कवि माने गए लेकिन उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति उसे मानी गई जिसमें उन्होंने प्रेम लिखा।
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बाबा नागार्जुन: एक अल्हड़ जनकवि, जिसकी पीड़ा में पलता है भारत
नागार्जुन की खासियत है कि उन्हें कोई अनगढ़ साहित्यकार पढ़े तो भाषाई रूप से समृद्ध हो जाए.
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किस्सा: मरते-मरते लाला ने ऐसा क्या किया जो गांव भर पहुंच गए जेल
किसी गांव में एक मुंशी रहता था, नाम था खटेसर लाल। बहुत धूर्त और काइंया किस्म का आदमी था। जितनी भद्दी शक्ल उतनी ही बुरी अक्ल। गांव वाले उसे राक्षस कहते थे। पाई-पाई का हिसाब रखता था। गांव भर में सूद पर पैसे बांटता फिर उगाही करता। दादा ले पोता बरते। हाल यह था कि…
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नहीं आना मुझे इतने बुरे संसार में अम्मा
नज़र आता है डर ही डर, तेरे घर-बार में अम्मा नहीं आना मुझे इतने बुरे संसार में अम्मा. यहाँ तो कोई भी रिश्ता नहीं विश्वास के क़ाबिल सिसकती हैं मेरी साँसें, बहुत डरता है मेरा दिल, समझ आता नहीं ये क्या छुपा है प्यार में अम्मा नहीं आना मुझे इतने बुरे संसार में अम्मा. मुझे…
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गांव आज भी धर्म नहीं समझ पाते तभी जुम्मन यादव होते हैं और रघुवीर खान
मेरे गांव में जुम्मन यादव होते हैं रघुवीर खान क्योंकि मेरा गांव हिन्दू मुसलमान नहीं जानता
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प्रजातंत्र एक अबूझ पहली है जिसका आधार भ्रम है
प्रजातंत्र के रक्षकों के लिए संविधान सिर्फ एक ढाल बनकर रह गया है जो समय-समय पर इन्हें सत्य पर असत्य की जीत दिलाता है। ये लोग भाषा की संयमता पर भी सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाते हुए एक-दूसरे पर आक्षेप लगाते है।
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कविता- तुम जानती हो चुराए हुए चुम्बनों का स्वाद?
तुम्हारे कुछ चुंबन बचे हैं मेरे होठों पर कुछ मेरे भी बचे हों शायद तुम्हारे पास ये हमारे पहले चुंबन नहीं थे ये चुराये हुये थे तुम्हारे पहले प्रेमी और मेरी पहली प्रेमिका से शायद उन दोनों को चूमना नहीं आता था चुराये हुये चुंबनों का स्वाद बहुत तीखा होता है इनमें मिली होती है…
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आज भी भटक रहा है गुनाहों का देवता
गुनाहों का देवता जितनी बार पढ़ता हूं हर बार कुछ नया पाता हूं। चन्दर इस बार पहले से ज्यादा भ्रमित लगा, सुधा पहले से और ज्यादा मजबूत। चन्दर मानवीय स्वभाव का एक बेहद शानदार उदाहरण है, जो थोड़ी सी परेशानियों में अपना खुदा ही बदल लेता है। सुधा अपने स्वभाव में चाहे जितनी कोमल और…
