बॉडीलाइन बॉल: गेंद जिसने दो देशों के संबंधों की लंका लगा दी

साल 1930 के इंग्लैंड दौरे पर गयी ऑस्ट्रेलियाई टीम के धाकड़ बल्लेबाज सर डोनाल्ड ब्रैडमैन ने अपनी धारदार बल्लेबाजी से इंग्लिश गेंदबाजों की हालत खस्ता कर दी थी। सरजी ने 5 टेस्ट मैचों में 139.14 के औसत से शानदार 974 रन बनाये थे, जो रिकॉर्ड 87 सालों बाद आज भी बरक़रार है, कोई भी दूसरा बल्लेबाज इस रिकॉर्ड के इर्द-गिर्द तक भी नहीं फटक पाया है।

जिनका सूर्य कभी अस्त नहीं होता, ऐसे देश वाली इंग्लिश क्रिकेट टीम के लिए यह एक शर्मनाक मंजर था कि उनके गेंदबाजों को एक खिलाड़ी मनचाहे तरीके से धो रहा है और उसे आउट करना तो दूर अव्वल रन बनाने से भी उसके गेंदबाज नहीं रोक पा रहे हैं। इसी शर्मनाक स्थिति को आगे होने से रोकने के लिए इंग्लिश गेंदबाजों ने एक खास तरीके की योजना बनाई, जिसे बॉडीलाइन या फ़ास्ट लेग थ्योरी बोलिंग नाम से जाना जाता है।

1930 की एशेज सीरीज के एक मैच में डॉन ब्रैडमैन ने 232 रन तो बनाये थे, मगर बारिश के बाद गीली हो गयी पिच पर उन्हें तेज गेंदबाज काफी परेशान कर रहे थे। खासकर वह गेंद जो उन्हें अपेक्षाकृत अधिक उछाल पर लेग साइड में फेंकी जा रही थी, जिन्हें खेलने के लिए उन्हें ऑफ साइड में अपने कदम पीछे खींचकर ऑन साइड में या तो पुल करना पड़ रहा था या हुक। इसके अलावा एक प्रथम श्रेणी मैच के दौरान तेज गेंदबाज एडी गिल्बर्ट ने ब्रैडमैन को 4 गेंदों में डक ऑउट किया था। ब्रैडमैन की बॉडीलाइन पर करी जा रही गेंदों को खेलने में होनी मुश्किल को सबसे पहले पूर्व इंग्लिश क्रिकेटर पर्सी फेंडर ने नोटिस किया और उसे इंग्लिश टीम के कप्तान डगलस जार्डिन संग साझा भी किया। इसके बाद इंग्लिश कप्तान जार्डिन ने आगामी ऑस्ट्रेलियाई दौरे के लिए फ़ास्ट लेग थ्योरी बॉलिंग या बॉडीलाइन पर गेंदबाजी करने के लिए अपने गेंदबाजों को तस्दीक किया।

जैसा कि बॉडीलाइन नाम से ही जाहिर है कि इसमें गेंद बल्लेबाज के शरीर पर फेंकी जाती है। दरअसल, गेंदबाज जानबूझकर बल्लेबाज को उसके लेग स्टंप पर या लेग स्टंप के बाहर शरीर पर बॉल पटकता है, मज़बूरी में बल्लेबाज इस गेंद को रक्षात्मक तरीके से रोकने कि कोशिश करता है और गेंद हवा में उठ जाती है। बल्लेबाज के आसपास छत्ते की मधुमक्खियों की भांति फील्डर फैले रहते हैं और हवा में उठी गेंद को आसानी से लपक लेते हैं।

यदि बल्लेबाज थोड़ा तीक्ष्ण बुद्धि का और ताकतवर है तो वह इस गेंद को पुल या हुक करके कुछ रन चुराने की कोशिश करता है। इसके तोड़ में भी गेंदबाजी कर रही टीम कुछ इंतज़ाम रखती है। बाउंड्री लाइन के आसपास 20-30 मीटर के दायरे में दो फील्डर तैनात कर दिए जाते हैं ताकि वे हवा में उठी गेंद को अपनी मुट्ठी में कैद कर लें।

1932 -1933 के दौरे पर ऑस्ट्रेलिया गयी इंग्लिश टीम के गेंदबाजों हेराल्ड लारवुड, बिली वोस ने डॉन ब्रैडमैन के अतिरिक्त बिली वुडफुल, बिली पोंसफोर्ड और एलन कीपैक्स जैसे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को न सिर्फ छकाया बल्कि कई खिलाड़ियों को चोटिल भी किया।सीरीज के 4 मैच इंग्लैंड ने जबकि मात्र 1 मैच ऑस्ट्रेलिया ने जीता, इस तरह मेजबान ऑस्ट्रेलिया ने 1 -4 के भारी अंतर से सीरीज को गँवा दिया। इंग्लैंड द्वारा आक्रामक और जेंटलमैन गेम के विपरीत साम-दाम तरीके से की गयी “फ़ास्ट लेग थ्योरी’ गेंदबाजी का असर ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड के राजनयिक कूटनीतिक सम्बन्धो पर भी पड़ा। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने इंग्लैंड की ‘हर हाल में जीतने’ की इस रणनीति की खूब लानत-मलानत की।


यह लेख संकर्षण शुक्ल ने लिखा है।

sankarshanshukla

मैं जीवन को अभी समझ ही रहा हूँ..........

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