Author: एडमिन

  • तमिल राजनीति में शुरू होगा ‘थलाइवा’ का ‘सियासी शो’
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    तमिल राजनीति में शुरू होगा ‘थलाइवा’ का ‘सियासी शो’

    सुपरस्टार रजनीकांत ने अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने की घोषणा कर दी है. जयललिता के रहते एकदम शांत और एकछत्र राज के तहत चल रहा तमिलनाडु जयललिता की मौत के बाद से एकदम अशांत हो चला था. पहले शशिकला का खुद को उनकी असली उत्तराधिकारी बताकर पार्टी और सरकार पर कब्जा और फिर नाटकीय रूप…

  • पुण्यतिथि: अवधी का वह कवि जिसने अज्ञेय से मिलने से मना कर दिया
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    पुण्यतिथि: अवधी का वह कवि जिसने अज्ञेय से मिलने से मना कर दिया

    गांव से ताल्लुक रखने वाले लोग कथरी (गुदड़ी) को खूब समझते होंगे। हमारी और हमारे पूर्वजों को बचपन में फोम और रूई के गद्दे नहीं मिला करते थे बल्कि पुराने कपड़ों को ही रीसाइकिल करते हुए, उनसे एक बिस्तर नुमा कथरी बनती थी।   मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि जिनका जिक्र आज यहां…

  • बुक रिव्यू: आलोक कुमार की ‘द चिरकुट्स’
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    बुक रिव्यू: आलोक कुमार की ‘द चिरकुट्स’

    अंग्रेजी बोलना पहले फैशन हुआ करता था लेकिन धीरे-धीरे यह सब आधार की तरह जरूरी होता जा रहा है। ऐसे में आजकल की कहानियों में एकाध पात्र जरूर अंग्रेजी से जूझता दिख जाता है। आलोक कुमार की किताब ‘द चिरकुट्स’ में भी एक ऐसा संघर्षरत प्राणी आता है जो वैसे तो बहुत टैलेंटेड है लेकिन…

  • बुक प्रीव्यू: वेश्या एक किरदार

    बुक प्रीव्यू: वेश्या एक किरदार

    पहली किताब हर रीडर के लिए राइटर बन जाने की वह सीमा होती है, जो हर रीडर एक ना एक दिन पार जरूर करना चाहता है। हिमांशु तिवारी ‘आत्मीय’ की किताब का नाम ‘वेश्या: एक किरदार है’। किताब के परिचय में हिमांशु लिखते हैं कि अच्छा बुक का टाइटल पढ़कर कई लोगों के ज़ेहन में…

  • बुक रिव्यू: डार्क नाइट- काम, माया और सौंदर्य में उलझी जिंदगी

    बुक रिव्यू: डार्क नाइट- काम, माया और सौंदर्य में उलझी जिंदगी

    प्रिया और माया के आकर्षण में डोलता कबीर, उस दोराहे के जंक्शन पर पहुंचता है, जहां उसकी पुरानी कल्पनाएं जीवित होना चाहती हैं। किसके प्रेम में ढलेंगी कबीर की कल्पनाएं? किसकी दहलीज पर जाकर रुकेगा कबीर के ख्वाबों का कारवां? माया या प्रिया? किताब का नाम: डार्क नाइट लेखक: संदीप नैयर प्रथम संस्करण: जनवरी 2018…

  • 6 दिसंबर 1992: उन्माद को नया रूप देने वाली एक तारीख
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    6 दिसंबर 1992: उन्माद को नया रूप देने वाली एक तारीख

    यहां मेरी बात पढ़कर अगर आप भी मुझे मुगल प्रेमी, हिंदू विरोधी, फर्जी सेकुलड़ या देशद्रोही जैसी उपाधियां देने दौड़े आते हैं तो सच कहता हूं कि आप के दिमाग में सिर्फ भूसा भरा है। हल्ला करते हुए नहीं मन में शांति से ‘जय श्री राम’ बोलिए मन को शांति मिलेगी और आंखों पर से…

  • विद्या बालन का फिल्म प्रमोशनल नारीवाद
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    विद्या बालन का फिल्म प्रमोशनल नारीवाद

    विद्या बालन का हालिया बयान उस समय तक एकदम सच लग रहा था, जब तक यह नहीं पता था कि उनकी फिल्म भी आने वाली है। पता चली कि विद्या की फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ रिलीज होने वाली है। विद्या फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में या यूं कहें ट्रेंड फॉलो करते हुए तथाकथित रूप से…

  • आरुषि हत्याकांड: किस वाली कोर्ट पर ज्यादा भरोसा करें?
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    आरुषि हत्याकांड: किस वाली कोर्ट पर ज्यादा भरोसा करें?

    9 साल पहले एक लड़की और एक नौकर को बेरहमी से मारा गया, पहुंचे-पहुंचाए लोगों का मामला था इसलिए खूब कवर हुआ और फिल्म भी बन गई लेकिन न्याय व्यवस्था आज भी अपराध के सामने हांफती दिख रही है। सीबीआई की दलीलों और सबूतों के दम पर निचली अदालत ने लड़की के माँ-बाप को दोषी…

  • ‘कुमार’ गैंग से सावधान रहना बेहद जरूरी है!

    सोशल मीडिया पर एक तबका नाम के हिसाब से दलितों का रहनुमा बनने की कोशिश करते नजर आता है। इसके लिए बाकायदा एक प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसमें पहला पड़ाव है अपने नाम के आगे ‘कुमार’ लिखना। इस जमात की दीक्षा के हिसाब से सबसे पहले वह इंसान इस समाज का सबसे बड़ा गुनहगार…

  • गांधी को पूजना आसान है, उनके रास्ते पर चलना बेहद मुश्किल

    गांधी को पूजना आसान है, उनके रास्ते पर चलना बेहद मुश्किल

    भारत का एक वर्ग बिना परिस्थितियों की जटिलता और सच्चाई को समझे महात्मा गांधी को ही भारत-पाकिस्तान विभाजन का कारण मानता है और मानता रहेगा। इसी सोच का नतीजा है कि गांधी जी की हत्या कर दी गई थी। जबकि गांधी तो हमेशा नेहरू और सरदार पटेल को समझाते रहे कि विभाजन की बात मत…