Author: एडमिन
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ईश्वर अगर नीरो या चंगेज खां है तो उसका नाश हो: भगत सिंह
भगत सिंह अपने लेख ‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ में एक तरफ खुद के नास्तिक हो जाने के कारणों को बताते हैं और यह भी स्पष्ट करते हैं कि उनकी नास्तिकता किसी अंहकार का नतीजा नहीं है। ईश्वर-अल्लाह या फिर गॉड को मानने वालों से भगति सिंह के कुछ सवाल हैं। आइए कोशिश करिए कि जवाब…
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धीरे-धीरे भरोसा हो रहा है कि पार्लियामेंट में डकैत ही होते हैं
इरफान खान की फिल्म सामने चल रही थी, फिल्म में डायलॉग आता है, ‘ बीहड़ में बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पाल्लियामेंट में।’ पान सिंह तोमर नाम की फिल्म के इस डायलॉग ने एक बार सोचने को मजबूर कर दिया। उस समय तो यह डायलॉग पसंद नहीं आया था लेकिन धीरे-धीरे खबरें पढ़ते और…
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भक्तो! मजबूर तुम हो, बीजेपी और अमित शाह नहीं
विकल्पहीनता धीरे-धीरे निरंकुशता को जन्म देती है। भारतीय राजनीति में भी एक बार फिर से यह प्रासंगिक हो चला है। इंदिरा-संजय गांधी की जोड़ी के बाद अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी भी हर जगह वही करती है, जो वो चाहती है। इंदिरा ने भी संगठन में खुद से बड़ा किसी को बनने नहीं…
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किसान मार्च: जीते हमेशा गांधी हैं, गोडसे कभी नहीं जीत सकता
11 मार्च 2018 को प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी संसद में बोलते हैं कि भारतीय राजनीति में सड़क के संघर्ष और धरना प्रदर्शनों की बहुत जगह नहीं रही गई है। अगले ही दिन उन्हें दिखाते हैं कि तरीका अगर गांधी वाला होगा तो सत्ता को संघर्ष के आगे झुकना ही पड़ेगा। महाराष्ट्र के 30,000 किसानों ने नासिक…
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मूर्तियां तोड़ने/बनाने से विचारधारा खत्म/स्थापित हो जाती है?
त्रिपुरा में लेफ्ट और राइट की लड़ाई के कुछ प्रत्याशित परिणाम नजर आने लगे हैं। पहले बीजेपी नेता हेमंत बिस्व शर्मा ने त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री को केरल या बांग्लादेश चले जाने की सलाह दी फिर कुछ उपद्रवियों द्वारा त्रिपुरा के बेलोनिया में व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को ढहा दिया गया, जिसे एक बीजेपी नेता…
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राजीव गांधी ने जो श्रीलंका में किया मोदी वही मालदीव में करेंगे?
मालदीव में सत्ता और न्यायालय के टकराव के बाद स्थिति गंभीर है। मालदीव का विपक्ष और कोर्ट भारत से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है। द टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से खबर छापी है कि भारत की सेना को आदेश दिए गए हैं कि वह मालदीव रवाना होने के लिए तैयार रहे।…
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घर लौटना चाहता है 1857 की क्रांति का एक सिपाही
लंदन के एक पब लॉर्ड क्लायड के मालिकों ने साउथ ईस्ट एशिया के इतिहास पर काम करने वाले इतिहासकार किम वैगनर से संपर्क किया है। दरअसल, इस पब में भारत के एक सिपाही आलम बेग की खोपड़ी रखी हुई है। अब पब मालिक किम से यह चाहते हैं कि वह आलम बेग के वंशजों से…
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बुक रिव्यू: किरदारों को वेश्या बताती ‘वेश्या: एक किरदार’
रिश्तों को एक-एक करके खोते जाना उस वेश्या की तरह एहसास करता है, जो लाख चाहकर भी उसी दुनिया में रहती है, जिसमें वह नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। जिंदगी में ऐसे एहसास लाने वाले किरदारों को ही हिमांशु तिवारी ने ‘वेश्या’ बताया है। छोटी-छोटी कहानियों को पढ़ते-पढ़ते कई बार जिंदगी का आईना आपके…
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बुक रिव्यू: मुझे तुम्हारे जाने से नफरत है
किताब का नाम: मुझे तुम्हारे जाने से नफरत है लेखिका: प्रियंका ओम प्रकाशक: रेडग्रैब बुक्स मूल्य:175 रुपये यह किताब 5 कहानियों का संकलन है। जिसमें से पहली कहानी अगर थोड़ी और बड़ी होती तो शायद वह एक उपन्यास हो जाता। किताब शुरू करने से पहले प्रियंका के बारे में मैं कोई राय नहीं बना पाया…
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तो क्या केजरीवाल ने इस बार रही-सही उम्मीद भी तोड़ दी?
मैं खुद आम आदमी पार्टी को उसके जन्म से जानता हूं, समझता हूं और काफी हद तक सहानुभूति रखता ‘था’। जी हां, रखता था। यह कहना है कई सारे ‘आप’ वालंटियर्स का। बुधवार को दिल्ली की 3 राज्यसभा की सीटों के लिए आम आदमी पार्टी यानी अरविंद केजरीवाल ने संजय सिंह (आप प्रवक्ता), सुशील गुप्ता…