Category: साहित्य

  • जन्मदिनः ‘मैं जो हूं जॉन एलिया हूं जनाब, इसका बेहद लिहाज कीजिएगा’ – जॉन एलिया
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    जन्मदिनः ‘मैं जो हूं जॉन एलिया हूं जनाब, इसका बेहद लिहाज कीजिएगा’ – जॉन एलिया

    हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाजे बयां और जिन लोगों ने जॉन एलिया को मंचों पर शेर पढ़ते सुना है वो गालिब के इस शेर का प्रायोगिक प्रस्तुतिकरण महसूस करते होंगे। इस शेर में गालिब की जगह जॉन लिख देने के बाद सिर्फ शेर की बहर…

  • पुण्यतिथिः शशि सूर्य हैं फिर भी कहीं, उनमें नहीं आलोक है – मैथिलीशरण गुप्त
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    पुण्यतिथिः शशि सूर्य हैं फिर भी कहीं, उनमें नहीं आलोक है – मैथिलीशरण गुप्त

    यह रिवर्स टैलेंट का दौर है,जब संघर्षों की आवश्यक प्रक्रियाएं रोचक कहानियों के आवरण में सहानुभूतिक शब्दों के टैगलाइन के साथ बेची जा रही हैं, निहित स्वार्थों के लिए। ऐसे में साहित्य के घोषित उद्देश्यों के अधीन गुप्त जी की इस कविता के माध्यम से अपने देश के किसानों और किसानी को महसूस कीजिए। गुप्तजी…

  • शबा का पिंक स्वेटर

    शबा का पिंक स्वेटर

    अनुज को सब याद है….. पिंक स्वेटर का डिज़ाइन जो माँ ने खान आंटी से सीखा था, उस स्वेटर का ऊन जो चौक से खरीदकर खान अंकल लाए थे और ये कि वह कैसे पूरे दिन माँ और खान आंटी के बीच 1नंबर सलाई(कांटा) से लेकर नौ नम्बर की सलाई इस घर से उस घर…

  • मिथक और इतिहास की आंख से वर्तमान को देखते थे कुंवर नारायण

    मिथक और इतिहास की आंख से वर्तमान को देखते थे कुंवर नारायण

    कुंवर उस दौर में कलम उठाते हैं जब वैश्विक इतिहास द्वितीय विश्वयुद्ध, भारतीय स्वाधीनता संग्राम और गांधी युग जैसे उल्लेखनीय घटनाक्रमों से साक्षात्कार कर रहा था।

  • कविता- तुम जानती हो चुराए हुए चुम्बनों का स्वाद?

    कविता- तुम जानती हो चुराए हुए चुम्बनों का स्वाद?

    तुम्हारे कुछ चुंबन बचे हैं मेरे होठों पर कुछ मेरे भी बचे हों शायद तुम्हारे पास ये हमारे पहले चुंबन नहीं थे ये चुराये हुये थे तुम्हारे पहले प्रेमी और मेरी पहली प्रेमिका से शायद उन दोनों को चूमना नहीं आता था चुराये हुये चुंबनों का स्वाद बहुत तीखा होता है इनमें मिली होती है…

  • घास इन कोठेवालियों की दूर की रिश्तेदार है

    घास इन कोठेवालियों की दूर की रिश्तेदार है

    जैसे बिन बोए उग आती है घास जमीन के हर हिस्से पर ठीक वैसे ही कुछ लड़कियां उगती हैं शहर की हर गली – हर नुक्कड़ से घास की तरह इनका हरापन तुम्हें ललचाता तो है मगर तुम इन्हें घर से दूर ही रखते हो क्योंकि हर हरी चीज गमले में नहीं लगाई जाती। ये…

  • ये मेरे हिन्दुस्तान को कौन सा रोग लग रहा है भाई!
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    ये मेरे हिन्दुस्तान को कौन सा रोग लग रहा है भाई!

    तुम हिन्दू हो ,मै मुस्लिम हूं। तुम्हारा रास्ता मंदिर तो मै मस्जिद को जाता हूं। तुम टीका लगाते हो तो मै टोपी पहनता हूं, तुम पूजा करते हो तो मैं नमाज अदा करता हूं। तुम गीता पाठ करते हो तो मैं कुरान तिलावत करता हूं। तुम भगवान को ईश्वर कहते हो तो मैं अल्लाह बुलाता…

  • ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है: साहिर लुधियानवी
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    ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है: साहिर लुधियानवी

    विभाजन के बाद साहिर ने हिंदुस्तान छोड़ दिया और पाकिस्तान चले गए। उस दौर के मशहूर फिल्म निर्देशक थे ख्वाजा अहमद अब्बास। अब्बास साहिर के दोस्त थे। साहिर के जाने से दुखी भी थे इसलिए उन्होंने इंडिया वीकली नाम के मैगजीन में साहिर के नाम खुला पत्र लिखा और उन्हें यह एहसास दिलाया कि जब…

  • कहानी: तीन दोस्त, सियासी गिद्ध और मौत

    कहानी: तीन दोस्त, सियासी गिद्ध और मौत

    मोहित,सोनू और इरफान की दोस्ती के चर्चे पूरे कस्बे में मशहूर थे। आखिर कौन भूल सकता था, जब कल्लू ने इरफान की बहन को छेड़ने वाले को बीच बाजार में नंगा कर दिया था। दरअसल, वो सिर्फ इरफान की ही बहन नही थी बल्कि वो मोहित और सोनू को भी हर रक्षाबंधन पर उनकी कलाई…

  • ये इश्क़ तो नहीं है

    ये इश्क़ तो नहीं है

    इश्क़ का कॉन्ट्रैक्ट करोगे? सुनो! कहो! प्यार हुआ है कभी तुम्हें? हां! कई बार। और जिनसे तुमने प्यार किया, क्या उन्हें भी तुमसे प्यार था? प्यार वन साइडेड कब होता है यार? इश्क़ सौदेबाज़ी है। गाना नहीं सुनती? सुनती हूं पर इतना सोच नहीं पाती। वैसे मुझसे ये सब क्यों मुझसे पूछ रही हो? इश्क़…