किसी चौराहे या पार्क में नीले रंग की एक मूर्ति, जिसके हाथ में किताब दबी हुई है, इस किताब के…
इस तरह सिर्फ सियासत बचेगी और इंसाफ मर चुका होगा
पाकिस्तान के कितने हाथ हैं जी? हर जगह पहुंच जाते हैं, कोई सरकार हार जाए या कोई घटना हो जाए…
पॉलिटिकल लव: चलो प्यार में उपवास रखते हैं…
तुम मेरी बात क्यों नहीं सुनते हो आज कल तो क्या तुम अब उपवास रखोगी सोच तो यही रही हूं!
कठुआ की वारदात धार्मिक कट्टरता का सबसे नीचतम रूप है
इस पूरी वारदात को मंदिर से हटाकर इसलिए भी नहीं देखा जा सकता क्योंकि इस घटना के पीछे धार्मिक द्वेष…
डूप्लेसिस भाई माफ करना, जूता मारना हमारी संस्कृति नहीं है
चेपक स्टेडियम में चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच हो रहे मैच के दौरान स्टेडियम में जूता…
उन्नाव रेप केस बताता है कि कानून सबके लिए एकसमान नहीं होता
एक लड़की राज्य के मुख्यमंत्री और सबसे ताकतवर नेताओं में से एक योगी आदित्यनाथ के पास गुहार लगाती है। आरोप…
ट्रोलिंग और पोस्टट्रुथ को क्रांति मानते हो तो आज के युवा हो तुम..!
आज राजनीतिक और सामाजिक विमर्श पोस्टट्रुथ और ट्रोलिंग के दहलीज पर पहुंच गए. और सबसे दिलचस्प ये है कि आज…
आंबेडकर का रंग चाहे जितना बदलो ‘असली वाला’ 2019 में दिखेगा
2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हालत पतली होने के बाद नरेंद्र मोदी ने खुद को विकास-पुरुष के रूप…
बुक रिव्यू: चार अधूरी बातें
कभी-कभी एक मुलाक़ात में बहुत सारी बातें हो जाती हैं और कभी-कभी बावजूद बहुत सारी मुलाक़ातों के कुछ बातें अधूरी…
न प्रेस कार्ड है, न प्रिंटिंग प्रेस, न नौकरी, फिर भी अखबार निकालता है यह पत्रकार
मुज़फ्फर नगर में एक पत्रकार ऐसा भी है जिसके पास न अपनी छपाई मशीन है, न कोई स्टाफ और न…