आज अगर रावण होता तो सबसे बड़ा टैक्स पेयर होता। भाई उसके पास सोने की लंका थी, वो सबकी लंका लगा देता। रावण को उसका […]
Month: September 2017
विरोध करने की आजादी
सच कहने की आजादी से महरूम हैं हम विरोध करने की आजादी में मशरूफ हैं हम इंसान की कौम का कुछ भी पता नहीं धर्मों […]
दिव्यमान उवाच- हमारी सोच में भयंकर खोट है
कभी-कभी ऐसा होता है हम तृतीय श्रेणी के सिनेमाघर में बैठे होते हैं और कुछ देर शालीनता से बैठने के बाद, जब हमारे पैरों को […]
वर्ल्ड हार्ट डे! ये दिल न होता बेचारा
विश्व हृदय दिवस है हृदय यानी दिल, जो न लेफ्ट होता है और न राइट। सेन्टर में होने की भी कोई संभावना नहीं है। अब […]
शहीद-ए-आज़म! हम भारतीय, बकवासी हैं।
भगत सिंह। नाम एक वाद अनेक। उन्हें राष्ट्रवादी भी उतना ही सगा मानते हैं जितना कि वामपंथी। पंथ का ज़िक्र इसलिए किया कि बिना इसके […]
पॉलिटिकल लव- मोहब्बत में लाठी चार्ज करोगे?
तुम न, आज कल कुछ भी बोलने लगे हो। अरे मेरी जान! लगता है BHU के VC की आत्मा मेरे अंदर आ गई। बस आत्मा […]
बेटियों पर लाठी चार्ज कर, बेटी बचा रहे हैं बीएचयू के वीसी
21 सिंतबर को शाम क़रीब 6 बजे के आसपास भारत कला भवन के सामने एक लड़की के साथ कुछ मनचले छेड़छाड़ करते हैं। लड़के बदतमीज़ी […]
एक रात की जेल
ग्वालियर से चलकर बनारस की ओर जाने वाली बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस गाड़ी स्ंख्या 11107, अपना पिछला स्टेशन छोड़ चुकी है और कुछ ही क्षणों में अपने […]
दंगाइयो की नज़रों से कब तक बचे रहेंगे गांव?
कॉलेज के आख़िरी दिनों में हमारे रहने का ठिकाना बना मेरठ के गंगानगर का एम ब्लॉक। जिस मकान में हम रहते थे उसी के बग़ल […]
जनवादी पत्रकारिता को तिलांजलि दे चुकी है मेन स्ट्रीम मीडिया
गुज़रा महीना समाचार और ख़बरों के बाज़ार के लिए बड़ा सीजन रहा क्योंकि साल का सबसे बड़ा ख़ुराक मीडिया को गुरमीत रामरहीम के नाम पर […]